बीएसए कॉलेज प्रबंध समिति चुनाव पर उठे वैधता के सवाल
मथुरा के बीएसए कॉलेज की प्रबंध समिति के चुनाव को लेकर विवाद गहरा गया है। विश्वविद्यालय द्वारा पर्यवेक्षक देने से इनकार के बावजूद चुनाव कराए जाने पर पारदर्शिता और वैधानिकता पर सवाल उठ रहे हैं।
विश्वविद्यालय ने पर्यवेक्षक नियुक्त करने से किया था इनकार।
आवश्यक अभिलेख उपलब्ध न होने का हवाला दिया गया।
चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और वैधानिकता पर उठे सवाल।
जन माध्यम
मथुरा। बाबू शिवनाथ अग्रवाल (बीएसए) कॉलेज की प्रबंध समिति के चुनाव को लेकर नया विवाद सामने आया है। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा द्वारा पर्यवेक्षक नियुक्त करने से इनकार किए जाने के बावजूद चुनाव कराए जाने पर इसकी पारदर्शिता और वैधानिकता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
कॉलेज प्रशासन के अनुसार विश्वविद्यालय ने 24 अप्रैल 2026 को जारी पत्र में स्पष्ट किया था कि चुनाव से संबंधित आवश्यक अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। ऐसे में निर्धारित औपचारिकताओं के अभाव में निर्वाचन प्रक्रिया को विधिसम्मत नहीं माना जा सकता।
विश्वविद्यालय ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया था कि प्रबंध समिति से जुड़ा मामला पहले से न्यायालय और राज्यपाल सचिवालय के विचाराधीन है। इसके अलावा लगातार प्राप्त हो रही शिकायतों को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर पर्यवेक्षक नियुक्त करना उचित नहीं समझा गया।
जानकारी के अनुसार चुनाव कराने वाले पक्ष ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए स्वयं विश्वविद्यालय से पर्यवेक्षक उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। हालांकि विश्वविद्यालय की असहमति के बावजूद चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
विवाद का एक अन्य पहलू यह भी है कि चुनाव कॉलेज परिसर में आयोजित नहीं किया गया। वहीं कॉलेज प्राचार्य की ओर से भी निर्वाचन प्रक्रिया के संबंध में कोई सार्वजनिक सत्यापन या आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
इन परिस्थितियों में चुनाव की वैधानिक स्थिति, पारदर्शिता और प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित पक्ष इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देते हैं और आगे प्रशासनिक अथवा कानूनी स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं।