बरेली: किला क्षेत्र में 200 साल पुराना पाकड़ का पेड़ बना 'टाइम बम'; मकानों पर झुकीं जड़ें, दहशत में रात काट रहे लोग

बरेली के किला थाना क्षेत्र अंतर्गत खन्नू मोहल्ला में हरि ज़ियारत के पास स्थित 200 वर्ष पुराना विशाल पाकड़ का पेड़ आंधी के बाद उखड़कर मकानों पर टिक गया है। 28 दिन बाद भी वन विभाग द्वारा कोई कार्रवाई न होने से स्थानीय लोगों में भारी दहशत है।

बरेली: किला क्षेत्र में 200 साल पुराना पाकड़ का पेड़ बना 'टाइम बम'; मकानों पर झुकीं जड़ें, दहशत में रात काट रहे लोग
HIGHLIGHTS:

ऐतिहासिक पेड़ बना आफत: किला के खन्नू मोहल्ला में स्थित करीब दो सदियों (200 वर्ष) पुराना विशालकाय पाकड़ का पेड़ आंधी के बाद उखड़कर तबाही का सबब बन चुका है।

मकानों पर टिका मलबे का बोझ: पेड़ अपनी मुख्य जमीन छोड़कर नगमा व विनोद के मकानों और कमल जनरल स्टोर की पक्की दीवारों पर खतरनाक ढंग से टिक गया है।

दीवारों में आईं दरारें: पेड़ के अत्यधिक भारी वजन और हालिया बारिश के कारण रिहायशी मकानों की दीवारों में चौड़ी दरारें पड़ने लगी हैं।

28 दिनों से कोई सुध नहीं: दरगाह के मुतवल्ली ने बताया कि 15 मई को ही वन विभाग और पुलिस को लिखित सूचना दी गई थी, लेकिन 28 दिन बीतने पर भी कोई कदम नहीं उठाया गया।

जन माध्यम
बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली महानगर अंतर्गत किला थाना क्षेत्र में एक बेहद संवेदनशील और जानलेवा लापरवाही का मामला सामने आया है। यहाँ के घने रिहायशी इलाके खन्नू मोहल्ला में स्थित सदियों पुराना एक विशालकाय वृक्ष अब स्थानीय निवासियों की जान और माल के लिए सीधा 'टाइम बम' बन चुका है। पिछले दिनों आई विनाशकारी आंधी-तूफान के बाद यह पेड़ अपनी मूल जगह से पूरी तरह उखड़ चुका है और पड़ोसी मकानों के सहारे हवा में लटका हुआ है। लगातार हो रही बारिश से पेड़ लगातार नीचे धंस रहा है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा घटित हो सकता है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, किला क्षेत्र के खन्नू मोहल्ला स्थित प्रसिद्ध हरि ज़ियारत (दरगाह मर्द शाह बाबा) के समीप लगभग 200 वर्ष पुराना ऐतिहासिक पाकड़ का एक विशाल पेड़ लगा हुआ है। बीते 15 मई को पूरे बरेली जनपद में आई तेज चक्रवाती आंधी के दौरान इस भारी-भरकम पेड़ की जड़ें जमीन से पूरी तरह उखड़ गईं।

असंतुलित होकर यह विशालकाय पेड़ पास में ही बने नगमा और विनोद के पक्के मकानों तथा कमल जनरल स्टोर की मुख्य दुकान की दीवार पर जाकर सीधे झुक गया। हाल ही में बुधवार और गुरुवार की रात आई 90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली आंधी और मूसलाधार बारिश के बाद पेड़ की जड़ों ने जमीन को और अधिक छोड़ दिया है, जिससे यह मकानों पर और ज्यादा झुक गया है।

मामले की गंभीरता को लेकर दरगाह मर्द शाह बाबा हरि ज़ियारत के मुतवल्ली सैयद मुदस्सर अली ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने प्रशासनिक तंत्र पर सवाल उठाते हुए बताया कि हादसे वाले दिन यानी 15 मई को ही स्थानीय किला थाना पुलिस और वन विभाग के कंट्रोल रूम को लिखित व मौखिक रूप से इस खतरे से अवगत करा दिया गया था।

लेकिन अत्यंत शर्मनाक बात है कि आज करीब 28 दिन (लगभग एक महीना) बीत जाने के बाद भी वन विभाग का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या कटर विंग मौके पर मुआयना करने तक नहीं पहुंची है। पीड़ित परिवार और आस-पास के दर्जनों पड़ोसी रात-रात भर जागकर आंधी के साए में खौफ के बीच जीवन गुजारने को मजबूर हैं।

इस गंभीर समस्या को देखते हुए प्रख्यात समाजसेवी पम्मी खां वारसी ने भी मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने बरेली जिला प्रशासन, प्रभागीय वनाधिकारी और नगर आयुक्त से तत्काल व्यक्तिगत हस्तक्षेप करने की पुरजोर मांग की है।

उन्होंने मांग उठाई कि इस 200 साल पुराने पाकड़ के पेड़ को हाइड्रोलिक क्रेन और आधुनिक उपकरणों की मदद से बिना मकानों को क्षति पहुंचाए सुरक्षित तरीके से तुरंत कटवाकर हटवाया जाए। इसके साथ ही उन्होंने नगर निगम को चेताया कि मानसून की पूर्ण दस्तक से पहले पूरे बरेली शहर में ऐसे तमाम जर्जर, अति-प्राचीन और क्षतिग्रस्त पेड़ों का एक सघन सर्वे कराया जाए, ताकि भविष्य में होने वाली किसी भी बड़ी जनहानि या संपत्ति के भारी नुकसान को समय रहते रोका जा सके। फिलहाल पूरे खन्नू मोहल्ले के नागरिक किसी चमत्कार और त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई की उम्मीद में टकटकी लगाए बैठे हैं।