जहाँ खौफ था, वहाँ अब भरोसा: डीआईजी

मुठभेड़ों, गिरफ्तारियों और गैंगस्टर कार्रवाई से अपराध जगत में मचा हड़कंप, जनता ने ली राहत की सांस।

जहाँ खौफ था, वहाँ अब भरोसा: डीआईजी
डीआईजी बरेली अजय कुमार साहनी
HIGHLIGHTS:

आठ महीनों में अपराधियों पर 98 प्रहार, कानून के सामने ढहता गया जुर्म का साम्राज्य।

175 गिरफ्तारी, 21 इनामी सलाखों के पीछे, बरेली परिक्षेत्र में अपराधियों की बढ़ी बेचैनी।

वर्दी के हौसले के आगे पस्त हुए बदमाश, जनता के दिलों में लौटा भरोसा।

जन माध्यम 
बरेली।
शहरों की असली रौनक चमकती सड़कों, ऊंची इमारतों या जगमगाती रोशनियों से नहीं होती, बल्कि उस सुकून से होती है जो लोगों के दिलों में बसता है। जब किसी मां की दुआ में अपने बच्चों की सलामती शामिल हो, जब किसी पिता की आंखों में परिवार की सुरक्षा का यकीन झलकता हो और जब बेटियों के कदम बेखौफ मंजिल की ओर बढ़ते हों, तब समझिए कि कानून अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभा रहा है। परिक्षेत्र में बीते आठ महीनों के दौरान ऐसी ही एक कहानी लिखी गई है,हौसले, जिम्मेदारी और कानून के इक़बाल की कहानी। डीआई अजय कुमार साहनी के नेतृत्व में अपराध के अंधेरों के खिलाफ जो जंग छिड़ी, उसने बदमाशों की नींद और जनता की चिंता, दोनों का हिसाब बदल दिया। हत्या, लूट, डकैती, अपहरण, गोवध और संगठित अपराधों में शामिल अपराधियों के खिलाफ चलाए गए विशेष अभियानों ने यह साबित कर दिया कि कानून की पकड़ अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है। 98 पुलिस कार्रवाई, 175 अपराधियों की गिरफ्तारी और 21 इनामी बदमाशों की धरपकड़ केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि उन अनगिनत दुआओं का जवाब हैं जो आम लोग अपनी सुरक्षा के लिए मांगते हैं।

इस पूरे अभियान का सबसे अहम  पहलू वह है, जिसे अक्सर आंकड़ों में नहीं देखा जाता। जब अपराधियों से मुकाबला हुआ तो 39 पुलिसकर्मी भी घायल हुए। किसी के हाथ में जख्म आया, किसी के पैर में चोट लगी, लेकिन किसी ने अपना फर्ज़ नहीं छोड़ा। क्योंकि वर्दी पहनने वाले इन जवानों के लिए अपनी तकलीफ से ज्यादा अहम जनता का सुकून था।

डीआईजी अजय कुमार साहनी ने केवल अपराधियों को गिरफ्तार करने की रणनीति नहीं बनाई, बल्कि अपराध की जड़ों को काटने का भी काम किया। गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई कर करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति जब्त की गई। यह उन लोगों के लिए सख्त पैगाम था जो जुर्म को कारोबार और कानून को कमजोर समझने की भूल कर बैठे थे। बरेली, बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर में हुई लगातार कार्रवाइयों ने अपराधियों के बीच यह एहसास पैदा कर दिया कि अब बच निकलना आसान नहीं है। दूसरी तरफ आम नागरिकों के दिलों में यह भरोसा मजबूत हुआ कि पुलिस उनके साथ खड़ी है।

दरअसल, कानून व्यवस्था सिर्फ गिरफ्तारी का नाम नहीं है। यह उस भरोसे का नाम है जो जनता के दिल में पैदा होता है। यह उस सुकून का नाम है जो किसी परिवार को रात में चैन की नींद देता है। और यही भरोसा, यही सुकून आज परिक्षेत्र में महसूस किया जा रहा है। डीआईजी अजय कुमार साहनी के नेतृत्व में चल रहा यह अभियान केवल अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं, बल्कि अमन, इंसाफ और सामाजिक सुरक्षा की एक ऐसी दास्तान है, जिसमें वर्दी का पसीना, जवानों का जज़्बा और जनता की दुआएं एक साथ दिखाई देती हैं। आज जब कानून का इक़बाल बुलंद है और अपराधियों के कदम डगमगाए हुए हैं, तब यह कहना गलत नहीं होगा कि परिक्षेत्र में वर्दी ने केवल अपना फर्ज़ नहीं निभाया, बल्कि लोगों के दिलों में सुरक्षा और भरोसे की एक नई रोशनी भी जलाई है। यही किसी भी पुलिस व्यवस्था की सबसे बड़ी कामयाबी होती है।