तहसील में रिश्वत का पर्दाफाश
बदायूं तहसील सदर में एंटी करप्शन टीम ने वारिसान दर्ज करने के नाम पर 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते लेखपाल को रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
➡️ तहसील सदर में एंटी करप्शन की कार्रवाई
➡️ वारिसान दर्ज करने के बदले मांगी रिश्वत
➡️ 10 हजार रुपये लेते लेखपाल गिरफ्तार
➡️ बरामदे में रंगे हाथ दबोचा गया
➡️ फरियादी ने एंटी करप्शन से की शिकायत
➡️ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में मुकदमा
➡️ तहसील परिसर में मचा हड़कंप
➡️ रिश्वतखोरी पर सख्त संदेश
जन माध्यम।
तहसील सदर परिसर मंगलवार दोपहर उस समय चर्चा और अफरा-तफरी का केंद्र बन गया, जब एंटी करप्शन टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक राजस्व लेखपाल को दस हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। आरोपी लेखपाल मृतक पिता की पैतृक संपत्ति में वारिसान दर्ज करने जैसे सीधे और कानूनी कार्य के बदले फरियादी से खुलेआम रुपये मांग रहा था। आरोपी लेखपाल महेंद्र सिंह के रवैये से पीड़ित फरियादी लंबे समय से परेशान था। वह तहसील के चक्कर काट रहा था, लेकिन हर बार कागजात अधूरे होने या अन्य बहानों का सहारा लेकर काम टाल दिया जाता था। अंतत लेखपाल ने साफ शब्दों में वारिसान दर्ज करने के बदले दस हजार रुपये की मांग कर दी। मजबूरी में घूस देने के बजाय पीड़ित ने साहस दिखाते हुए एंटी करप्शन विभाग से शिकायत की।
शिकायत की पुष्टि के बाद एंटी करप्शन टीम ने पूरी योजना के तहत जाल बिछाया। मंगलवार दोपहर तहसील सदर के बरामदे में जैसे ही लेखपाल ने फरियादी से रिश्वत की रकम हाथ में ली, टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे मौके पर ही दबोच लिया। अचानक हुई इस कार्रवाई से तहसील परिसर में मौजूद कर्मचारी और फरियादी सन्न रह गए। कुछ देर तक पूरा परिसर पुलिस और टीम की हलचल से गूंजता रहा। बताया जा रहा है कि आरोपी लेखपाल पहले भी आम लोगों को ऐसे ही कानूनी कार्यों के नाम पर परेशान करता रहा था। वारिसान दर्ज करना एक सामान्य प्रक्रिया होने के बावजूद उससे अवैध धन वसूली की जा रही थी, लेकिन इस बार रिश्वतखोरी का खेल बीच तहसील में ही बेनकाब हो गया।
एंटी करप्शन टीम आरोपी को हिरासत में लेकर अपने साथ ले गई। उसके विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जा रहा है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। विभाग ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी सरकारी कर्मचारी द्वारा रिश्वत मांगे जाने पर भयभीत न हों और तत्काल शिकायत दर्ज कराएं। शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। यह कार्रवाई साफ संदेश है कि घूसखोरी के खिलाफ सख्ती अब लगातार जारी रहेगी।