महिला की मौत पर यूनिसन नर्सिंग होम सीज

बहेड़ी के यूनिसन नर्सिंग होम में ऑपरेशन के दौरान महिला की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को सीज कर दिया। जांच में कई अनियमितताएं सामने आईं, कार्रवाई को लेकर विभाग पर सवाल खड़े।

महिला की मौत पर यूनिसन नर्सिंग होम सीज
HIGHLIGHTS:

➡️ ऑपरेशन के दौरान महिला की मौत
➡️ जांच में मिलीं कई अनियमितताएं
➡️ डिप्टी सीएमओ ने पुलिस मौजूदगी में किया सीज
➡️ झोलाछाप और मानकविहीन अस्पतालों पर उठे सवाल

मुम्ताज अली। जन माध्यम
बहेड़ी (बरेली)। नगर के बाईपास स्थित यूनिसन नर्सिंग होम में ऑपरेशन के दौरान महिला की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अस्पताल को सीज कर दिया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी के निर्देश पर पहुंची टीम ने जांच में कई मानकों की अनदेखी पाई, जिसके बाद डिप्टी सीएमओ डॉ. अमित कुमार ने पुलिस की मौजूदगी में नर्सिंग होम को सील कर दिया।

जानकारी के अनुसार कोतवाली क्षेत्र के ग्राम पिपरिया रंजीत निवासी 33 वर्षीय गीता पत्नी राजपाल को बच्चेदानी में गांठ की शिकायत थी। परिजन उन्हें ऑपरेशन के लिए उक्त नर्सिंग होम लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान महिला की हालत अचानक बिगड़ गई और गुरुवार देर रात उसकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि उपचार में लापरवाही बरती गई और हालत गंभीर होने पर संबंधित डॉक्टर अस्पताल छोड़कर चला गया।

घटना की सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच गए और हंगामा किया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया तथा शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया। जांच टीम ने अस्पताल के दस्तावेज, पंजीकरण और संचालन संबंधी व्यवस्थाओं की पड़ताल की। जांच में आवश्यक मानकों की अनदेखी, उपकरणों की कमी और नियमों के उल्लंघन जैसी खामियां सामने आईं। इसके बाद अस्पताल को सीज कर दिया गया।

हालांकि इस कार्रवाई के साथ कई गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। यदि अस्पताल में इतनी अनियमितताएं थीं तो क्या स्वास्थ्य विभाग को इसकी पहले जानकारी नहीं थी? क्या बिना मानक पूरे किए नर्सिंग होम लंबे समय से संचालित हो रहा था? यदि हां, तो नियमित निरीक्षण क्यों नहीं हुआ?

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में कई निजी अस्पताल और क्लीनिक बिना पर्याप्त सुविधाओं के संचालित हो रहे हैं। क्या यह कार्रवाई केवल घटना के बाद की औपचारिकता है, या अब व्यापक स्तर पर जांच अभियान चलाया जाएगा? क्या स्वास्थ्य विभाग ऐसे संस्थानों की समय-समय पर जांच सुनिश्चित करेगा ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी न झेलनी पड़े?

परिजनों ने आरोपित डॉक्टर और अस्पताल संचालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि केवल अस्पताल सीज करना पर्याप्त नहीं, बल्कि जिम्मेदार लोगों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज होना चाहिए।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। लेकिन बड़ा प्रश्न यह है कि क्या यह कार्रवाई जिले में अवैध और मानकविहीन अस्पतालों पर व्यापक अभियान की शुरुआत बनेगी, या फिर किसी अगली दुखद घटना का इंतजार किया जाएगा?