मुठभेड़ पर उठे सवाल
सहारनपुर में कथित झूठी मुठभेड़ मामले में देवबंद के एसीजेएम ने जेल पहुंचकर घायल बंदियों से पूछताछ की। बंदियों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए, हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद मामला गरमाया।
➡️ देवबंद एसीजेएम ने जेल पहुंचकर घायल बंदियों से की पूछताछ
➡️ बंदियों ने पुलिस पर झूठी मुठभेड़ और प्रताड़ना के लगाए आरोप
➡️ हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद बढ़ी संवेदनशीलता
हशमे आलम । जन माध्यम
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद में कथित झूठी मुठभेड़ को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की हालिया सख्त टिप्पणी के एक सप्ताह के भीतर देवबंद न्यायालय के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट स्वयं देवबंद कारागार पहुंच गए और मुठभेड़ों में घायल बंदियों को पंक्ति में खड़ा कर उनसे पूछताछ की। इस निरीक्षण का दृश्य व्यापक रूप से प्रसारित होने के बाद पुलिस विभाग में हलचल मची हुई है, हालांकि आधिकारिक स्तर पर अब तक कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है।
कारागार में पूछताछ के दौरान एक बंदी ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए। संबंधित बंदी ने कथित झूठी मुठभेड़ के विरुद्ध न्यायालय में प्रार्थना पत्र भी दे रखा है। पूछताछ में उसने बताया कि सहारनपुर में उसकी पेशी थी और वह बागपत से आ रहा था। आरोप है कि उसे शामली पार्क क्षेत्र से उठा लिया गया। बंदी का कहना है कि उसके चल-अचल दूरभाष यंत्र की स्थिति से इस बात की पुष्टि हो सकती है।
बंदी ने आरोप लगाया कि उसे चौकी पर ले जाकर विद्युत प्रवाह दिया गया, मारपीट की गई और अपराध स्वीकार करने के लिए दबाव बनाया गया। उसने यह भी कहा कि बाद में उसे जंगल में ले जाया गया, जहां उसके पैर पर वस्त्र रखकर निकट दूरी से गोली मारी गई। आरोप है कि इसके बाद पुलिस ने स्वयं अवैध हथियार से गोली चलाकर घटना को मुठभेड़ का रूप दे दिया। न्यायिक अधिकारी के पूछने पर बंदी ने बैठकर पूरी घटना का क्रमवार विवरण दोहराया। अन्य घायल बंदियों से भी इसी प्रकार पूछताछ की गई।
उल्लेखनीय है कि एक सप्ताह पूर्व इलाहाबाद उच्च न्यायालय में मुठभेड़ों से जुड़े प्रकरण की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने कड़ी टिप्पणी की थी। न्यायालय ने कहा था कि उत्तर प्रदेश को पुलिस राज्य बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह भी कहा गया था कि कुछ अधिकारी समय से पूर्व पदोन्नति और प्रशंसा पाने के उद्देश्य से आरोपितों के पैरों में गोली मारकर चोट पहुंचाते हैं। उस समय पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण तथा अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद भी न्यायालय में उपस्थित थे।
अब देवबंद कारागार में न्यायिक निरीक्षण के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो यह केवल एक मुठभेड़ का प्रश्न नहीं रहेगा, बल्कि विधि-व्यवस्था और मानवाधिकारों से जुड़ा व्यापक विषय बन सकता है। फिलहाल निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।