मेरठ के स्कूल में छात्रों को ‘मुर्गा’ बनाकर सजा देने का वायरल वीडियो

Meerut के एक स्कूल में छात्रों को ‘मुर्गा’ बनाकर सजा देने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने से विवाद खड़ा हो गया। अभिभावकों ने जांच की मांग की, प्रशासन मामले की पड़ताल में जुटा।

मेरठ के स्कूल में छात्रों को ‘मुर्गा’ बनाकर सजा देने का वायरल वीडियो
HIGHLIGHTS:

➡️ स्कूल परिसर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
➡️ अनुशासनहीनता पर छात्रों को ‘मुर्गा’ सजा
➡️ अभिभावकों ने की जांच की मांग
➡️ प्रशासन ने कहा - मामले की होगी पड़ताल

हशमे आलम । जन माध्यम
मेरठ।
उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक स्कूल के भीतर छात्रों को ‘मुर्गा’ बनाकर खड़े करने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बड़ा विवाद खڑا हो गया है। वायरल क्लिप में कुछ छात्रों को विद्यालय परिसर में ‘मुर्गा’ की स्थिति में खड़ा किया गया दिखाई दे रहा है, जिसे कई ग्रामीणों ने रिकॉर्ड कर सोशल प्लेटफॉर्म पर साझा किया। इस वायरल वीडियो ने स्कूल में बच्चों के साथ अनुशासनात्मक प्रथाओं और शारीरिक दंड के उपयोग पर व्यापक बहस शुरू कर दी है।

वीडियो में कुछ छात्रों को हाथ ऊपर और ‘मुर्गा’ की स्थिति में खड़ा रखने का क्रम दिखता है, जिसके बारे में स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सजा छात्रों को विद्यालय की यूनिफ़ॉर्म न पहनने और अनुशासनहीनता के आरोप पर दी गई। ग्रामीणों ने सोशल मीडिया पर यह क्लिप साझा कर शिक्षकों के व्यवहार की निंदा की है और प्रशासनिक जांच की मांग की है।

एक ग्रामीण जिसने वीडियो रिकॉर्ड किया, ने कहा कि जैसे ही उन्होंने पूछा कि क्यों बच्चों को ऐसी स्थिति में खड़ा किया जा रहा है, एक शिक्षक ने कहा, “बच्चे बदतमीजी करेंगे तो पिटेंगे।” इस बयान ने कई अभिभावकों और यूज़र्स के बीच चर्चा को और गहरा कर दिया है कि क्या इस तरह की सज़ा बच्चों के अनुशासन सुधार का सही तरीका है या यह गलत व्यवहार की श्रेणी में आता है।

इस घटना ने शिक्षा में शारीरिक दंड के उपयोग समेत व्यापक मुद्दों को फिर उभार दिया है। पिछले साल भी उत्तर प्रदेश में वायरल हुए वीडियो को लेकर बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) द्वारा जांच के आदेश दिए गए थे, जब एक शिक्षक कक्षा में आराम से बैठे रहने या बच्चों को अनदेखा करने का वीडियो सामने आया था, जिससे अभिभावकों में नाराजगी पनपी थी।

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अनुशासन बनाना आवश्यक है, परंतु किसी भी प्रकार का दंड या सजा बच्चों की गरिमा और शिक्षा के मूल उद्देश्य के अनुरूप होना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि वीडियो वायरल होने के बाद विद्यालय प्रशासन और शिक्षा विभाग को तथ्यों की जांच कर उचित कदम उठाना चाहिए ताकि छात्रों के साथ किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार को रोका जा सके।

प्रशासन की ओर से अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है कि वायरल वीडियो की पुष्टि हुई या नहीं, और क्या इस मामले में जांच शुरू की गई है। लेकिन सोशल मीडिया पर अभिभावकों और नागरिकों की प्रतिक्रिया ने यह दर्शाया है कि शारीरिक दंड के स्थान पर संवेदनशील और सकारात्मक अनुशासनात्मक विधियों को अपनाना जरूरी माना जा रहा है।

(नोट: वायरल वीडियो के संबंध में स्थानीय प्रशासन या विद्यालय प्रबंधन द्वारा आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है; उपरोक्त विवरण वायरल पोस्टों और स्थानीय दावों पर आधारित है।)