माल्टा राजदूत से शहीद स्थल पर चर्चा

सेंथल (बरेली) में शहीदे माल्टा हकीम सैयद नुसरत हुसैन स्मृति स्थल के उद्घाटन को लेकर उर्फी रज़ा ज़ैदी ने माल्टा के राजदूत रुबिन गूशी से मुलाकात की।

माल्टा राजदूत से शहीद स्थल पर चर्चा
HIGHLIGHTS:

➡️ माल्टा राजदूत रुबिन गूशी से शहीद स्थल पर महत्वपूर्ण चर्चा
➡️ शहीदे माल्टा हकीम सैयद नुसरत हुसैन के उद्घाटन की तैयारी
➡️ माल्टा की कब्र की मिट्टी भारत लाने की पहल की सराहना
➡️ भारत-माल्टा ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर

सरफराज़ खान । जन माध्यम
सेंथल (बरेली)।
माल्टा (यूरोप) से दिल्ली आए स्वतंत्रता सेनानी नवाब सैयद ग़ालिब अली के वंशज उर्फी रज़ा ज़ैदी ने माल्टा दूतावास में माल्टा के राजदूत रुबिन गूशी से शहीद स्थल उद्घाटन एवं प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर महत्वपूर्ण मुलाकात की। यह भेंट कोड़ा जहानाबाद स्थित शहीदे माल्टा हकीम सैयद नुसरत हुसैन के स्मृति स्थल के उद्घाटन के संदर्भ में हुई।

मुलाकात के दौरान उर्फी रज़ा ज़ैदी ने शहीदे माल्टा हकीम सैयद नुसरत हुसैन के जीवन, उनके स्वतंत्रता संग्राम में योगदान और माल्टा निर्वासन से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वह शहीदे माल्टा के जीवन पर एक विस्तृत पुस्तक भी लिख रहे हैं, जिसमें स्वतंत्रता संग्राम के उन अध्यायों को सामने लाया जाएगा, जो अब तक व्यापक रूप से प्रकाश में नहीं आ सके हैं।

राजदूत रुबिन गूशी ने हकीम सैयद नुसरत हुसैन की माल्टा स्थित कब्र की मिट्टी को भारत लाने की पहल की सराहना की। उन्होंने इसे भारत और माल्टा के ऐतिहासिक संबंधों के प्रतीक के रूप में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रयास दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रिश्तों को और मजबूत करेंगे। उन्होंने इसे देश की एकता और अखंडता के दृष्टिकोण से भी प्रेरणादायक बताया।

ज्ञात हो कि उर्फी रज़ा ज़ैदी स्वतंत्रता सेनानी परिवार से संबंध रखते हैं और अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी परिषद के सदस्य भी हैं। वह 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी पारिवारिक धरोहरों के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। इनमें ऐतिहासिक मोहन मंदिर भी प्रमुख रूप से शामिल है, जो स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों को संजोए हुए है।

इस अवसर पर शहीदे माल्टा हकीम सैयद नुसरत हुसैन के प्रपौत्र एवं टाउन एरिया जहानाबाद के चेयरमैन सैयद आबिद हुसैन भी उपस्थित रहे। उन्होंने शहीद स्थल के उद्घाटन को ऐतिहासिक अवसर बताते हुए कहा कि यह कार्यक्रम आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों से परिचित कराएगा।

आयोजकों का मानना है कि शहीद स्थल का उद्घाटन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि यह स्वतंत्रता संग्राम के अनदेखे अध्यायों को जनमानस तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनेगा।