वर्दी पर लगा रिश्वत का दाग

मेरठ में एंटी-करप्शन टीम ने हापुड़ क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह को 4 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। हत्या के केस से नाम हटाने के बदले घूस लेने का आरोप है।

वर्दी पर लगा रिश्वत का दाग
HIGHLIGHTS:

➡️ मेरठ में इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह रिश्वत लेते गिरफ्तार
➡️ 4 लाख रुपये की घूस लेते रंगे हाथ पकड़े गए
➡️ हत्या केस से नाम हटाने का आरोप
➡️ घर पर बुलाकर ली जा रही थी रिश्वत
➡️ एंटी-करप्शन टीम ने वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ की कार्रवाई
➡️ पुराने गैंगरेप कांड में भी रहा है विवादों से नाता
➡️ गिरफ्तारी से पुलिस महकमे में हड़कंप

जन माध्यम।

हशमे आलम। मेरठ।
वर्दी अगर भरोसे की पहचान है, तो रिश्वत उस भरोसे पर सबसे बड़ा सवाल।
उत्तर प्रदेश पुलिस एक बार फिर उसी सवाल के कटघरे में खड़ी है, जहां कानून के रखवाले पर कानून बेचने का आरोप लगा है। बुधवार सुबह मेरठ में एंटी-करप्शन यूनिट की एक बड़ी कार्रवाई ने पूरे पुलिस महकमे को झकझोर दिया। हापुड़ क्राइम ब्रांच में तैनात इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह को 4 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया।

यह गिरफ्तारी कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र के रोहटा रोड स्थित उनके आवास पर हुई, जहां इंस्पेक्टर ने खुद पीड़ित को रिश्वत की रकम लेकर बुलाया था। जैसे ही पैसों का पैकेट सौंपा गया, पहले से जाल बिछाए बैठी एंटी-करप्शन टीम ने उन्हें दबोच लिया। पूरी कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई है, जिससे मामले की पुष्टि और मजबूत हो गई है।

महेंद्र सिंह वर्तमान में हापुड़ जिले के एसपी कार्यालय में डीसीआरबी और रिट सेल प्रभारी के पद पर तैनात हैं। आरोप है कि वे बागपत जिले के रिछपाल हत्याकांड की विवेचना कर रहे थे। इसी केस में उन्होंने पीड़ित पक्ष से 4 लाख रुपये की मांग की थी, ताकि दो आरोपियों के नाम जांच से हटा दिए जाएं और केस की दिशा बदली जा सके। पीड़ित नोएडा का निवासी है, जिसने भ्रष्टाचार से तंग आकर पहले ही एंटी-करप्शन विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी।

कार्रवाई के समय इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह ट्रैकसूट पहने हुए थे। गिरफ्तारी के बाद उन्हें कंकरखेड़ा थाने ले जाया गया, जहां लंबी पूछताछ जारी है। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एफआईआर दर्ज की जा रही है और जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ेगी।

महेंद्र सिंह का नाम भ्रष्टाचार और विवादों से पहली बार नहीं जुड़ा है। वर्ष 2016 के बुलंदशहर हाईवे गैंगरेप कांड के समय वे ककोड़ थाने के एसएचओ थे। उस दौरान दो निर्दोष युवकों को फर्जी आरोपी बनाकर पेश करने और बाद में 80 हजार रुपये लेकर छोड़ने का आरोप लगा था। यह मामला उस समय प्रदेश भर में सुर्खियों में रहा था।

इस ताजा गिरफ्तारी ने यह सवाल फिर खड़ा कर दिया है कि जब जांच अधिकारी ही सौदेबाजी पर उतर आएं, तो पीड़ित को इंसाफ कैसे मिलेगा। एक सीनियर इंस्पेक्टर की गिरफ्तारी से पुलिस विभाग में हड़कंप है और यह कार्रवाई आने वाले दिनों में कई और परतें खोल सकती है।

फिलहाल, एंटी-करप्शन टीम की यह कार्रवाई एक कड़ा संदेश जरूर देती है—
कानून के नाम पर सौदा करने वालों के लिए अब वर्दी ढाल नहीं बनेगी।