परीक्षा नहीं, अफरा तफरी
रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने बीएससी माइनर परीक्षा ऐन वक्त पर स्थगित कर छात्रों को असमंजस में डाल दिया। देर से आदेश जारी होने से केंद्रों पर अफरा-तफरी और छात्रों में भारी आक्रोश देखा गया।
➡️ बीएससी गणित, सांख्यिकी व रक्षा अध्ययन माइनर की परीक्षा ऐन वक्त पर स्थगित
➡️ सुबह 9 बजे की परीक्षा से ठीक पहले जारी हुआ आदेश
➡️ प्रश्नपत्र केंद्रों तक पहुंचने के बाद लिया गया फैसला
जन माध्यम
बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यहां परीक्षा नहीं, प्रयोग होते हैं और प्रयोग भी छात्रों के भविष्य पर। बुधवार सुबह बीएससी गणित, सांख्यिकी और रक्षा अध्ययन माइनर की परीक्षा थी। छात्र समय से पहले उठे, दूर दराज से पहुंचे, केंद्रों के बाहर लाइन में लगे और तभी रुवि ने ऐसा आदेश थमा दिया, जिसने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी परीक्षा स्थगित।
सुबह नौ बजे पेपर शुरू होना था। प्रश्नपत्र नोडल सेंटर से निकल चुके थे, केंद्रों पर अनुशासन और सन्नाटा था, लेकिन विश्वविद्यालय दफ्तरों में जैसे अचानक नींद खुली। परीक्षा से महज़ एक घंटे पहले जारी हुए आदेश ने कॉलेजों को अराजकता में धकेल दिया। केंद्रों पर अफसरों के पास जवाब नहीं थे और छात्रों के पास सिर्फ़ गुस्सा। बरेली कॉलेज में ही पहली पाली के लिए 1646 छात्र पंजीकृत थे। शिक्षकों ने जैसे तैसे हालात संभाले, लेकिन जिन छात्रों ने किराया खर्च किया, छुट्टी ली और तैयारी में महीनों लगाए उनके लिए यह फैसला सीधा तमाचा था। छात्र पूछ रहे थे अगर परीक्षा टालनी ही थी, तो सुबह तक इंतज़ार क्यों किया गया? छात्रों का कहना है कि रुवि प्रशासन की आदत बन चुकी है तारीखें बदलो, सूचना देर से दो और फिर खामोशी ओढ़ लो। पहले 5 फरवरी की बात, फिर बदलाव और अब ऐन वक्त पर स्थगन। कारण क्या था? इसका जवाब आज भी फाइलों में कैद है।
अब कहा जा रहा है कि परीक्षा 16 फरवरी को होगी। लेकिन सवाल सिर्फ़ नई तारीख का नहीं है। सवाल उस व्यवस्था की साख का है, जो बार बार छात्रों को मानसिक, आर्थिक और भावनात्मक नुकसान पहुंचा रही है। रुवि को समझना होगा परीक्षाएं कैलेंडर से नहीं, जिम्मेदारी से चलती हैं। वरना हर स्थगन के साथ छात्रों का भरोसा भी स्थगित होता जाएगा।