बजट नहीं, फिर भी टेंडर… 24 घंटे में रद्द

बरेली में 4.50 करोड़ की सिटी स्टेशन-किला पुल CC रोड का टेंडर बिना बजट के निकला और 24 घंटे में रद्द! ठेकेदारों ने लगाया पक्षपात का आरोप।

बजट नहीं, फिर भी टेंडर… 24 घंटे में रद्द
HIGHLIGHTS:

↗️ बजट ही नहीं था, फिर टेंडर क्यों?
↗️ 7 ठेकेदार पास → 24 घंटे में सब रद्द!
↗️ 20-25 लाख की EMD डूबी ठेकेदारों की
↗️ आरोप: चहेती फर्म को ठेका दिलाने की साजिश
↗️ PWD बोला: DUDA का काम, बजट नहीं आया
↗️ 1.5 किमी सड़क गड्ढों से भरी, रोज जाम
↗️ लोग पूछ रहे: सड़क बनेगी या फाइलों में घूमेगी?

बरेली में 4.50 करोड़ की सिटी स्टेशन-किला पुल सड़क फिर फंसी, ठेकेदारों ने लगाया पक्षपात का आरोप

हसीन दानिश/ जन माध्यम 
बरेली।
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनकैप) के तहत 4.50 करोड़ रुपये से बनने वाली सिटी स्टेशन से किला पुल तक सीसी रोड का टेंडर एक बार फिर विवादों में घिर गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नगर निगम ने अभी तक बजट जारी ही नहीं किया था, तो लोक निर्माण विभाग (पी.डब्लू.डी.) ने टेंडर क्यों निकाला? और तकनीकी बोली खुलने के महज 24 घंटे बाद ही उसे निरस्त क्यों कर दिया गया? 15 नवंबर को पीडब्ल्यूडी के प्रांतीय खंड ने टेंडर की तकनीकी बिड खोली थी, जिसमें सात ठेकेदार फर्में योग्य पाई गईं। ठेकेदारों ने 20-25 लाख रुपये तक की ईएमडी (जमानत राशि) भी जमा कर दी थी। लेकिन अगले ही दिन अधिशासी अभियंता भगत सिंह की रिपोर्ट पर अधीक्षण अभियंता प्रकाश चंद्र ने पूरा टेंडर निरस्त कर दिया। टेंडर रद्द होने से ठेकेदारों में भारी आक्रोश है। उनका सीधा आरोप है कि बजट न होना सिर्फ बहाना है। असल मकसद किसी खास चहेती फर्म को ठेका दिलाना था, इसलिए योग्य ठेकेदारों को बाहर कर टेंडर रद्द किया गया। एक ठेकेदार ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हमने लाखों रुपये की ईएमडी जमा की, कागजात पूरे किए, फिर एक झटके में सब रद्द। यह साफ-साफ पक्षपात है।”वहीं पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता भगत सिंह ने सफाई दी है कि यह सड़क मूल रूप से डिस्ट्रिक्ट अर्बन डेवलपमेंट एजेंसी (डी.यू.डी.ए) का काम है और बजट नगर निगम से आना था। उन्होंने कहा, समय बचाने के लिए हमने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी थी, लेकिन तकनीकी बिड खुलने तक बजट नहीं मिला। इसलिए मजबूरी में टेंडर रद्द करना पड़ा। ठेकेदारों की जमानत राशि जल्द लौटा दी जाएगी। बजट मिलते ही दोबारा टेंडर निकाला जाएगा। चौपुला पुल से किला पुल तक करीब 1.5 किमी लंबी यह सड़क दिल्ली, लखनऊ और बदायूं जाने का मुख्य मार्ग है। सड़क जगह-जगह उखड़ी हुई है, गड्ढों से भरी है। रोज हजारों वाहन चालक यहां फंसते हैं। ट्रैफिक जाम आम बात हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी इसी रास्ते से गुजरते हैं, फिर भी सालों से निर्माण टलता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बजट स्वीकृति के बिना टेंडर निकालना ही नियमों के खिलाफ है। नगर निगम और पीडब्ल्यूडी के बीच तालमेल की कमी साफ नजर आ रही है। ठेकेदारों और आम जनता ने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
लोग अब सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर यह सड़क बनेगी या फिर फाइलों में गोल-गोल घूमती रहेगी?