गोलियों की गूँज से लेकर न्याय की दस्तक तक

बरेली में दिशा पाटनी के घर 11 और 12 सितंबर को हुई लगातार फायरिंग ने शहर को दहशत में डाल दिया था। सीएम योगी से लेकर एसएसपी अनुराग आर्य तक पूरा सिस्टम सक्रिय हो गया। ढाई हजार से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज, 7 जिलों की छानबीन और कई एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई के बाद रोहित गोदारा–गोल्डी बराड़ गैंग की साजिश उजागर हुई। 19 सितंबर को ट्रॉनिका सिटी में हुई मुठभेड़ में दो अपराधी मारे गए। फरार बदमाशों पर 1–1 लाख का इनाम रखा गया। बाद में प्रशासन ने पाटनी परिवार को सुरक्षा कवच और शस्त्र लाइसेंस जारी किया। यह घटना साबित करती है कि संगठित अपराध कितना ही बड़ा हो, पुलिस की सख्ती उसका अंत तय कर देती है।

गोलियों की गूँज से लेकर न्याय की दस्तक तक
HIGHLIGHTS:

✅ 11 सितंबर पहली गोली की गूंज पाटनी परिवार की खामोश चीखें,
✅ 12 सितंबर  दूसरी रात का हमला बरेली दहशत में डूबा,
✅ सीएम योगी का फोन घबराइए नहीं पूरी सुरक्षा आपके साथ,
✅ एसएसपी अनुराग आर्य  वह कप्तान जिसने खामोशी को जवाब में कार्रवाई दी,
✅ बड़ा खुलासा शूटर बरेली में 5 दिन रहकर करते रहे रेकी,
✅ 19 सितंबर ट्रॉनिका सिटी में गर्जीं बंदूकें… दो अपराधियों का अंत

दिशा पाटनी के घर हुई फायरिंग ने बरेली को हिलाया,15 दिनों में पुलिस की ऐसी कार्रवाई कि अपराधियों की सांसें थम गईं

जन माध्यम
बरेली।
11 सितंबर की वो सवेरा शायद पाटनी परिवार कभी भूल नहीं पाएगा। शहर की उस शांत कॉलोनी में जब पहली गोली की आवाज़ गूंजी थी, वो सिर्फ लोहे का टुकड़ा नहीं था,वह डर की पहली दस्तक थी। और अगले ही दिन 12 सितंबर की रात, जब फिर गोलियां चलीं… वह सिर्फ फायरिंग नहीं थी,एक परिवार की शांति, सुरक्षा और सम्मान पर किया गया हमला था।
लेकिन इस कहानी का सबसे बड़ा हिस्सा गोलियों की आवाज़ में नहीं, बल्कि उस जंगल में शेर की तरह खड़े सिस्टम में था, जिसने तय कर दिया था।यह वारदात किसी भी कीमत पर बेनकाब होगी।सुबह का अंधेरा अभी बाकी था।
कॉलोनी सो रही थी।
दिशा पाटनी के पिता जगदीश पाटनी अपने घर के भीतर बैठकर चाय की चुस्कियाँ ले रहे थे।
और तभी…अपाचे बाइक की गड़गड़ाहट और पीछे बैठे शूटर की पिस्तौल ने रात की ख़ामोशी चीर दी।पहली बार सिर्फ दो गोलियां चलीं… जैसे बदमाश यह बता रहे हो,
हम आ चुके हैं।पाटनी परिवार ने इसे चेतावनी समझकर चुप्पी ओढ़ ली।
लेकिन अपराधियों की नजर उस खामोशी पर भी थी।उन्हें पता था कि डर का खेल अभी शुरू हुआ है।ठीक 24 घंटे बाद फिर वही बाइक।
वही नकाबपोश बदमाश।
लेकिन इस बार गोलियों में चेतावनी नहीं… नफरत, जिद और खौफ का संदेश भरा था।घर की दीवारें छलनी हो गईं, गेट चटक गया, दरवाज़े तक गोलियों के निशान उतर आए।
दिशा की मां ने डर से खुशबू और अपने पति को बाहर नहीं निकलने दिया और कमरे में बंद कर दिया।
मेजर खुशबू पाटनी ने अपनी सैन्य ट्रेनिंग के बावजूद पहली बार ऐसा डर महसूस किया, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।और उस रात जगदीश पाटनी कुछ भी नहीं बोले।
बस खिड़की से दीवारों में धंसी गोलियों को देखते रहे…उनका दिल पूछ रहा था,आख़िर कौन है, जिसने हमारे घर को निशाना बनाया?
अगले ही दिन लखनऊ से फोन आया,सीएम योगी आदित्यनाथ की आवाज़ में दृढ़ता थी।उन्होंने कहा
अपराधी बचेगा नहीं। सुरक्षा हमारी ज़िम्मेदारी है।यह सिर्फ भरोसा नहीं था, बल्कि कार्रवाई की शुरुआत।दिशा पाटनी के घर की गोलियों की आवाज़ ने शहर की पुलिस लाइन में भी तूफ़ान ला दिया था।
एसएसपी अनुराग आर्य ने एक ही वाक्य में यह केस अपने हाथ में ले लिया यह वारदात बरेली में हुई है, और इसका अंत बरेली की पुलिस ही करेगी।और फिर शुरू हुआ वह ऑपरेशन… जिसकी कहानी आने वाले सालों में पुलिस की ट्रेनिंग में पढ़ाई जाएगी।एसएसपी ने एक-एक ईंट पलटने का फैसला कर लिया।
साइबर सेल,सर्विलांस,एसटीएफ
एसओजी,आई-ट्रिपल-सी टीम,
क्राइम ब्रांच,हर टीम को एक ही आदेश गैंग पकड़ा जाना चाहिए, चाहे ज़मीन उलटनी पड़े।
ढाई हजार से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए।7 जिलों के हाईवे देखे गए।सैकड़ों नंबर ट्रेस हुए।
और आखिरकार… पुलिस साजिश के करीब पहुँची।गैंग का चेहरा उजागर रोहित गोदारा और गोल्डी बराड़ का खूनी प्लान जांच में सामने आया कि यह हमला न किसी व्यक्तिगत विवाद का था, न किसी दुश्मनी का।यह हमला एक गैंग द्वारा भेजा गया ताक़त का संदेश था।
रोहित गोदारा का वीडियो आया
ये सिर्फ ट्रेलर है… अगली बार खत्म कर देंगे। वीडियो कुछ ही घंटों में डिलीट कर दिया गया,लेकिन पुलिस ने स्क्रीनशॉट से लोकेशन ट्रैक कर ली।अब साफ हो चुका था ये खेल साधारण नहीं, गैंगस्टरों का था।
सबसे बड़ा खुलासा हमला करने वाले बरेली में 5 दिन तक रुके थे
यह सुनकर शहर दहल गया।रविंद्र उर्फ कालू प्रीत पैलेस होटल
अरुण हिंद गेस्ट हाउस,नकुल और विजय शहर में लगातार रेकी
बाइक पिस्टल हर बार बदली गई
यानी 11 और 12 सितंबर की गोलियां सिर्फ ट्रिगर पर दबाए गए उंगलियों का खेल नहीं था यह एक संगठित साजिश थी। 19 सितंबर को एसटीएफ, नोएडा और दिल्ली पुलिस ने संयुक्त ऑपरेशन चलाया।
घंटों की मुठभेड़ हुई और अंत में… दो बदमाश रविंद्र और अरुण ज़मीन पर गिर चुके थे। उनके पास से मिली,विदेशी जिगाना पिस्टल,कई कारतूस,बाइक,नकली नंबर प्लेट

एसएसपी अनुराग आर्य ने कहा बरेली में दहशत फैलाने वालों को हम सांस लेने नहीं देंगे।
रोहित गोदारा की हरकत अपराधियों को शहीद बताने की कोशिश
एनकाउंटर के बाद गोदारा ने धर्म का रंग देने की कोशिश की। लेकिन पुलिस ने दो टूक कहा शहीद वो नहीं होते जो निर्दोषों पर गोली चलाएं।
शहीद वो होते हैं जो वर्दी पहनकर जनता की रक्षा करते हैं।यह चेतावनी पूरे गैंग तक गई और उसके बाद से कोई गैंगस्टर बरेली के करीब भी नहीं आया।फरार बदमाशों पर 1–1 लाख का इनाम,नकुल और विजय अब भी फरार,पहले 25 हजार,फिर 50 हजार,उसके बाद एडीजी ने 1-1 लाख का इनाम घोषित किया
पूरे प्रदेश में फोटो चिपका दी गई।
होटलों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन हर जगह लगातार दबिशें। उसके बाद डीएम बरेली ने पाटनी परिवार को मिला सुरक्षा कवच दिया है हमले के दो महीने बाद,डीएम अवनीश सिंह ने जगदीश पाटनी को पिस्टल का शस्त्र लाइसेंस जारी किया।एसएसपी अनुराग आर्य ने उनकी सुरक्षा और बढ़ा दी।अब घर के बाहर 24 घंटे पिकेट है।पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है।
हर आने-जाने वाले पर नजर रखी जा रही है।और अब… यह कहानी खत्म नहीं,यह चेतावनी है यह वारदात सिर्फ दिशा पाटनी के घर पर चली गोलियों की नहीं थी,
यह उस सिस्टम की भी कहानी है,
जो जागता है…खड़ा होता है…और अपनी जनता को यह एहसास दिलाता है,हम हैं… और जब तक हम हैं, कोई बदमाश आपकी ओर नज़र उठाकर नहीं देख सकता।यह कहानी बताती है,अपराध कितना भी शातिर हो,गैंग कितना भी बड़ा,
और प्लानिंग कितनी भी गहरी
जब पुलिस अपना शिकंजा कसती है,तो अपराधी का अंत तय हो जाता है।