बिजली विभाग मीटर घोटाला: बड़े साहब सेट, छोटे की कुर्बानी...

बिजली विभाग मीटर घोटाला: बड़े साहब सेट, छोटे की कुर्बानी...
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HIGHLIGHTS:

1. विजिलेंस टीम ने फरीदपुर में की थी छापेमारी, सरकारी रिकॉर्ड से बाहर पाए गए थे कई मीटर  

बरेली। करोड़ों के मीटर घोटाले में वही पुराना खेल खेला गया—बड़े साहब तो सेट हो गए। मगर, छोटे कर्मचारी की बलि चढ़ा दी गई। विजिलेंस टीम की जांच में भारी हेरफेर सामने आई। लेकिन कार्रवाई का पूरा भार केवल एक मामूली कर्मचारी पर डाल दिया गया। जबकि असली मास्टरमाइंड चैन की बंसी बजा रहे हैं।

बीती 19 मार्च को विजिलेंस टीम ने फरीदपुर में छापा मारा और रोहिताश शर्मा उर्फ लाल करन के घर से भारी संख्या में बिजली मीटर बरामद किए। ये मीटर सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थे। जिससे साफ हुआ कि करोड़ों की हेराफेरी की गई थी। लेकिन जब कार्रवाई की बारी आई तो गाज गिरी सिर्फ टी.जी.-2 शिवरतन पर। बड़े अफसरों ने खुद को बचाने के लिए पूरा दांव खेला और सफाई से खुद को किनारे कर लिया। क्या वाकई करोड़ों के इस खेल में सिर्फ एक छोटे कर्मचारी की भूमिका थी? सूत्रों के मुताबिक इस घोटाले में कई बड़े अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं। मगर, जांच की दिशा को ऐसा मोड़ा गया कि सारा दोष सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर आ जाए। मतलब साफ है—बड़े साहबों की सेटिंग इतनी मजबूत है कि वे हर बार बच निकलते हैं। यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी बिजली मीटर घोटाले, बिलिंग में धांधली और फर्जी रसीदों के खेल सामने आए हैं। हर बार नतीजा वही निकलता है—बड़े अफसर बच निकलते हैं और निचले स्तर के कर्मचारी को बलि का बकरा बना दिया जाता है। इस बार भी वही कहानी दोहराई गई है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बिजली मीटरों की अनियमित स्थापना और रिकॉर्ड में हेराफेरी के कारण सरकारी राजस्व को करोड़ों का भारी नुकसान हुआ। मगर, इसके बावजूद भी केवल शिवरतन को ही निलंबित किया गया। जबकि इस गड़बड़ी में संलिप्त बड़े अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस घोटाले के खुलासे के बाद बिजली विभाग के बाकी कर्मचारी भी खौफ में हैं। उन्हें डर है कि अगला नंबर उनका भी हो सकता है। अगर निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आगे भी बड़े अधिकारी सेट होते रहेंगे और मेहनतकश कर्मचारी फंसते रहेंगे।