अंधकार में शायरा की दुनिया

बरेली जिला अस्पताल में मोतियाबिंद ऑपरेशन की लापरवाही से 55 साल की शायरा की दाहिनी आंख की रोशनी हमेशा के लिए चली गई। परिवार का आरोप- डॉक्टर दोषी।

अंधकार में शायरा की दुनिया
HIGHLIGHTS:

↗️ 4 नवंबर: जिला अस्पताल में मोतियाबिंद ऑपरेशन
↗️ अगले दिन डिस्चार्ज → घर आईं तो पूरा अंधेरा
↗️ डॉ. डी.एन. सिंह ने कहा 2-4 दिन में ठीक
↗️ हफ्ता बीता, सिर्फ दर्द बढ़ा, रोशनी जीरो
↗️ प्राइवेट डॉक्टर: रोशनी वापस लाना नामुमकिन
↗️ गरीब परिवार बर्बाद, मां अब जीवन भर रोएगी
↗️ CMO को शिकायत, दोषी डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग

जिला अस्पताल की लापरवाही से आंखों की रोशनी गई, जांच और कार्रवाई की मांग


जन माध्यम 
बरेली।
बहन अब कुछ दिखाई नहीं देता… सब अंधेरा है। ये शब्द जब 55 वर्षीय शायरा ने अपनी छोटी बहन हमीदा से फुसफुसाए, तो घर में सन्नाटा छा गया। जिस आंख से वह अपने बच्चों और पोते-पोतियों के चेहरे पर मुस्कान देखती थीं, उसी आंख में अब केवल काला पर्दा है। और यह पर्दा किसी बीमारी का नहीं, बल्कि महाराणा प्रताप जिला अस्पताल में हुई घोर लापरवाही का परिणाम है।शायरा गरीब परिवार से ताल्लुक रखती हैं। मोतियाबिंद के इलाज के लिए उन्होंने 4 नवंबर  को जिला अस्पताल के नेत्र विभाग में दाहिनी आंख का ऑपरेशन करवाया। अगले ही दिन उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। घर लौटते ही उजाले की जगह अंधकार ने ले ली। परिवार ने तुरंत दुबारा अस्पताल का रुख किया, जहां डॉक्टर ने महंगी दवाइयां लिख दी और आश्वासन दिया कि दो-चार दिन में सब ठीक हो जाएगा। लेकिन समय बीतता गया, आंख में दर्द बढ़ा और रोशनी वापस नहीं आई।
17 नवंबर को परिजन फिर डॉक्टर के पास गए, तो उन्हें निजी चिकित्सक के पास भेज दिया गया। जांच के बाद विशेषज्ञ ने साफ कहा स्थिति गंभीर है, रोशनी वापस लाना लगभग नामुमकिन है। खर्चा अत्यधिक होगा।हमीदा की आंखों में आंसू हैं। वह कहती हैं, दीदी अब रात-दिन रोती रहती हैं। कहती हैं  मैं अंधी हो गई, मेरे बच्चे कौन संभालेंगे? हमने सरकारी अस्पताल पर भरोसा किया था, मगर वही भरोसा तोड़ दिया गया।अब परिवार ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को लिखित शिकायत दी है। दोषी डॉक्टर के खिलाफ विभागीय जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है  शायरा की आंखों में उजाला फिर कौन लौटाएगा?जिला अस्पताल प्रशासन की खामोशी गहरी नाराजगी और पीड़ा बढ़ा रही है। एक मां, बहन और पत्नी जीवन भर के अंधकार में धकेल दी गई। उसकी पुकार गूंज रही है मेरी आंख की रोशनी आखिर कौन लौटाएगा?