लापरवाही पर गिरी गाज, तीन सिपाही सस्पेंड 

ड्यूटी से गायब रहने पर 3 कांस्टेबल सस्पेंड, 10 चौकी प्रभारियों को फटकार, SSP अनुराग आर्य का संदेश – जनता का दर्द नहीं समझेगा तो वर्दी नहीं पहनेगा।

लापरवाही पर गिरी गाज, तीन सिपाही सस्पेंड 
HIGHLIGHTS:

➡️ 3 सिपाही तत्काल सस्पेंड
➡️ ड्यूटी से गायब, बिना सूचना गैरहाजिर
➡️ यूको बैंक, गेट ड्यूटी, अवकाश के बाद न लौटना
➡️ 10 चौकी इंचार्ज को कड़ी फटकार-चेतावनी
➡️ सुस्ती, शिकायतों में देरी पर SSP का गुस्सा
➡️ संदेश: जनता का दर्द नहीं समझेगा, वर्दी नहीं पहनेगा

दस चौकी इंचार्ज को कड़ी चेतावनी जो जनता का दर्द नहीं समझेगा, वह वर्दी का हकदार नहीं

जन माध्यम 
बरेली।
ठंडी होती सुबहों के बीच अचानक एक ऐसी खबर आई जिसने शहर की पुलिसिंग में नई ऊर्जा, नया भरोसा और नई उम्मीद जगा दी।यह खबर सिर्फ विभागीय कार्रवाई भर नहीं थी, बल्कि यह एक संदेश था कि वर्दी सिर्फ पहनी नहीं जाती, निभाई जाती है और जो नहीं निभा सके, उन्हें उस वर्दी का अधिकार नहीं। इस एहसास के बीच एसएसपी अनुराग आर्य का वह कड़ा फैसला सामने आया, जिसने दिखा दिया कि कानून व्यवस्था का पहरा सिर्फ अपराधियों पर नहीं, बल्कि पुलिस के भीतर की लापरवाही पर भी उतनी ही मजबूती से रखा जाता है। तीन सिपाही निलंबित, क्योंकि वर्दी पर धूल जमने का हक किसी को नहीं पुलिस लाइनों में खामोशी थी सूत्र बताते हैं कि निलंबन आदेश पढ़ते ही कई पुलिसकर्मी सन्न रह गए। क्योंकि लंबे समय से चला आ रहा एक संदेश आखिरकार सच हो गया
अनुशासनहीनता अब किसी कीमत पर नहीं बख्शी जाएगी। कांस्टेबल राकेश कुमार  रिजर्व पुलिस लाइन 22 अक्टूबर की सुबह उन्हें गेट नंबर 1 की सुरक्षा ड्यूटी पर होना था। लेकिन जनता की सुरक्षा का वह दरवाज़ा खाली खड़ा था
और वर्दी कहीं और।किसी अफसर के मन को यह चुभता है कि सुरक्षा की जिम्मेदारी पर ताला लगा कर कोई कैसे आराम कर सकता है?
उसी क्षण निर्णय लिया गया
निलंबन। कांस्टेबल योगेश कुमार  यूको बैंक सुरक्षा बैंक सुरक्षा कोई मामूली काम नहीं। लाखों की संपत्ति, जनता का भरोसा सब उसी ड्यूटी पर टिके होते हैं। लेकिन निरीक्षण में वे नदारद थे।फिर लगातार बिना सूचना गैरहाजिर। एसएसपी का यह शब्द दिल में उतर गया अगर जनता हमें ढूंढे और हम ही गायब हों यह कैसी पुलिसिंग?
और इसलिए निलंबन। आरक्षी अनिल कुमार  थाना क्योलड़िया
अवकाश के सात दिन लेकर गए
पर लौटकर नहीं आए। चाहे व्यक्तिगत समस्या हो या कोई परेशानी डिपार्टमेंट को बिना बताए महीनों तक गायब रहना व्यवस्था को चोट पहुँचाता है।और व्यवस्था कमज़ोर पड़े, यह एसएसपी अनुराग आर्य कभी होने नहीं देंगे।
इसलिए निलंबन।क्योंकि चौकी जनता की चौखट है, और चौखट की बेइज्जती नहीं होती थानों और चौकियों का निरीक्षण करते समय एसएसपी ने कई जगह सुस्ती, शिकायतों में देरी और जनता की पीड़ा के प्रति अनदेखी देखी।
हर चौकी वह जगह होती है जहाँ एक गरीब, एक पीड़ित, एक परेशान इंसान उम्मीद लेकर जाता है।
और जब वही दरवाज़ा उनकी पीड़ा का बोझ हल्का करने के बजाय और बढ़ाने लगे  तो यह अपराध से बड़ा अपराध है। इसलिए दस चौकी प्रभारी, चाहे उनका अनुभव, पहचान या पद कुछ भी रहा हो
सभी को एक ही शब्द सुनने पड़े
कड़ी चेतावनी। और इसके पीछे सिर्फ एक भावना थी जनता की तकलीफ को कभी हल्के में मत लो।
जो जनता का दर्द नहीं समझे, वह मेरे विभाग में नहीं चलेगा,
उन्होंने कहा पुलिसकर्मी वही नहीं जो वर्दी पहने,पुलिसकर्मी वह है जो जनता का दर्द अपने दिल तक ले जाए।जो मेहनत करे, ईमानदारी करे वह सम्मान पाएगा।जो लापरवाही करेगा  वह बच नहीं पाएगा।
क्योंकि मेहनत और ईमानदारी करने वालों को आखिर एक ऐसा कप्तान मिला है जो उनकी इज्जत करता है,
और लापरवाही करने वालों के लिए एक ऐसा कप्तान मिला है जो बिना डर कार्रवाई करता है। हर पुलिसकर्मी अब जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने को बाध्य होगा 
हर थाने, हर चौकी में चर्चा है
अब काम करके दिखाना पड़ेगा,
अब मनमानी नहीं चलेगी,
अब जनता से खराब व्यवहार किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं होगा।
यह माहौल डर का नहीं,सुधार का है। यह दंड का नहीं,ज़िम्मेदारी का है।यह तानाशाही नहीं, चेतावनी है
कि ईमानदारी चलन बनेगी, और लापरवाही अपराध।