संविधान दिवस पर बसपा में कलह

संविधान दिवस पर बसपा में गुटबाजी उजागर, कई वरिष्ठ पदाधिकारी कार्यक्रम से नदारद रहे।

संविधान दिवस पर बसपा में कलह
HIGHLIGHTS:

➡️ संविधान दिवस पर बसपा में खुली गुटबाजी
➡️ जिला अध्यक्ष ने चुपके से मनाया कार्यक्रम
➡️ वरिष्ठ पदाधिकारी कार्यक्रम से दूर
➡️ सूचना न मिलने पर मंडल कोऑर्डिनेटर नाराज़
➡️ तस्वीरों ने बढ़ाया विवाद
➡️ पार्टी में अविश्वास और विभाजन उजागर

जिला अध्यक्ष ने चुपके से मनाया कार्यक्रम, वरिष्ठ पदाधिकारी रहे नदारद

जन माध्यम
बरेली।
संविधान दिवस जैसे सम्मानित अवसर पर बहुजन समाज पार्टी एक बार फिर अंदरूनी गुटबाजी के कारण सुर्खियों में आ गई। जिला अध्यक्ष जयपाल सिंह ने पार्टी कार्यालय में संविधान दिवस का कार्यक्रम आयोजित तो कर लिया, लेकिन पार्टी के आधे से अधिक जिम्मेदार पदाधिकारियों को इसकी जानकारी तक नहीं हुई। सूचना न दिए जाने से न सिर्फ संगठनात्मक अनुशासन पर सवाल खड़ा हुआ, बल्कि यह भी साबित हो गया कि बसपा में अंदरूनी मतभेद अब सतह पर खुलकर उभर आए हैं।मंडल कोऑर्डिनेटर ओमकार कातिब ने कार्यक्रम की अनभिज्ञता पर नाराज़गी जताते हुए कहा, हमें कोई सूचना नहीं दी गई। अगर वाकई कार्यक्रम हुआ, तो हमें क्यों नहीं बुलाया गया?जिला सचिव वेद प्रकाश मिंटू भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, संविधान दिवस जैसे पवित्र मौके पर भी पार्टी एकजुट नहीं दिख सकी। यह स्पष्ट संकेत है कि बसपा में अंतरकलह अपने चरम पर है।”
उधर, जिला अध्यक्ष जयपाल सिंह समर्थक अपनी सफाई में कुछ तस्वीरें साझा कर रहे हैं, जिनमें वे बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र पर माल्यार्पण करते दिखाई दे रहे हैं। तस्वीरों में जगदीश प्रसाद बाबूजी व और भी पदाधिकारी मौजूद हैं। लेकिन इन तस्वीरों ने सवाल और गहरा कर दिया जब पार्टी के मुख्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता ही नदारद थे, तो क्या यह वास्तव में संविधान दिवस का सामूहिक आयोजन था या सिर्फ गुट विशेष का प्रतीकात्मक कार्यक्रम?
कार्यकर्ताओं के बीच अब खुलकर चर्चा है कि जिस पार्टी की पहचान सामाजिक न्याय और एकता का संदेश देने से है, वही पार्टी अपने घर में एकजुटता दिखाने में नाकाम क्यों हो रही है?संविधान दिवस पर बसपा की यह स्थिति इस बात का संकेत है कि पार्टी का आंतरिक ढांचा पहले की तुलना में ज्यादा कमज़ोर, विभाजित और अविश्वास से घिरा हुआ है।