मानवता वाली पुलिसिंग की मिसाल

एसएसपी ऑफिस में एक बुज़ुर्ग फरियादी के सम्मान में एसपी ट्रैफिक खुद खड़े होकर उसकी समस्या सुनने पहुंचे। मानवीय पुलिसिंग की इस घटना की शहर में खूब सराहना हो रही है।

मानवता वाली पुलिसिंग की मिसाल
HIGHLIGHTS:

➡️ एसपी ट्रैफिक मोहम्मद अकमल खान बुज़ुर्ग फरियादी के सम्मान में खड़े हुए।
➡️ झुककर प्रार्थना पत्र लिया, पूरी समस्या ध्यान से सुनी।
➡️ एसएसपी अनुराग आर्य ने तत्काल निस्तारण के निर्देश दिए।
➡️ ऑफिस में छाया मानवीय पुलिसिंग का दिल छू लेने वाला दृश्य।
➡️ शहरभर में संवेदनशील पुलिसिंग की खूब सराहना।

बुज़ुर्ग फरियादी के सम्मान में एसपी ट्रैफिक ने खड़े होकर सुनी समस्या 

जन माध्यम 
बरेली। पुलिस की वर्दी सिर्फ कानून का प्रतीक नहीं, संवेदनशीलता और मानवता की पहचान भी है इसका जीता जागता उदाहरण सोमवार को एसएसपी ऑफिस में देखने को मिला। रोजाना यहां अनगिनत लोग अपनी फरियाद लेकर आते हैं,कुछ चलने में असमर्थ, कुछ उम्र के आख़िरी पड़ाव पर। लेकिन एसएसपी अनुराग आर्य की कार्यशैली का सबसे बड़ा क़ायदा यही है कि फरियादी छोटा बड़ा नहीं होता, इंसान होता है, और उसकी बात को सम्मान के साथ सुना जाता है। सोमवार को शाही इलाके के एक बेहद बुज़ुर्ग व्यक्ति अपनी ज़मीन के विवाद को लेकर एसएसपी कार्यालय पहुंचे। उम्र इतनी ज्यादा कि खड़े होना भी मुश्किल, और आवाज़ में थरथराहट उतनी ही गहरी। जब उन्हें प्रार्थना पत्र सौंपने के लिए खड़े होने को कहा गया, तो बुज़ुर्ग ने धीमी आवाज़ में कहा बेटा मैं उठ नहीं सकता। यह सुनते ही ऑफिस का माहौल बदल गया।
एसएसपी अनुराग आर्य ने बिना एक पल गंवाए संकेत किया, और एसपी ट्रैफिक मोहम्मद अकमल खान तुरंत अपनी सीट से उठ खड़े हुए मुस्कुराते हुए बोले आप नहीं उठ सकते, तो हम आपके पास आकर आपकी बात सुन सकते हैं। यह वाक्य न सिर्फ उस बुज़ुर्ग की आंखों में चमक ले आया, बल्कि वहां मौजूद हर व्यक्ति को भीतर तक छू गया। एसपी ट्रैफिक खुद उनके पास पहुंचे, झुककर प्रार्थना पत्र लिया और पूरी समस्या ध्यान से सुनी। एसएसपी ने तत्काल संबंधित थाने को निर्देश दिए और बुज़ुर्ग को भरोसा दिलाया कि समस्या का समाधान तुरंत होगा।
बुज़ुर्ग जब ऑफिस से निकले, तो चेहरे पर संतोष की मुस्कान थी मानो किसी बेटे ने उनका हाथ थाम लिया हो। पुलिस की इस मानवीय पुलिसिंग की शहरभर में सराहना हो रही है। एसएसपी अनुराग आर्य हमेशा अधिकारियों को निर्देश देते हैं
कोई भी महिला, बच्चा या बुज़ुर्ग आए उसे सम्मान से बैठाइए, सुनिए, और तुरंत समाधान कीजिए।
यह वही पुलिसिंग है, जिसकी जनता वर्षों से उम्मीद करती आई है जहाँ वर्दी दिल के साथ काम करती है।