रिश्तों की सियासत में उभरता एक भरोसेमंद चेहरा
बरेली में बदलते सियासी माहौल के बीच डॉ पवन सक्सेना एक भरोसेमंद और संवेदनशील चेहरे के रूप में उभर रहे हैं। सर्वे में मजबूत समर्थन मिलने के बाद चर्चा तेज हो गई है।
सर्वे में मजबूत समर्थन के साथ उभरा नया चेहरा
जनता के बीच बढ़ रहा भरोसा और अपनापन
पत्रकारिता से समाज तक का लंबा अनुभव
बदलते सियासी समीकरणों के बीच चर्चा तेज
हसीन दानिश। जन माध्यम
बरेली। सियासत जब सिर्फ आंकड़ों से आगे बढ़कर दिलों में जगह बनाने लगे, तब एक नाम कहानी बन जाता है। शहर की राजनीति में इन दिनों एक ऐसा ही नाम चर्चा में है जो धीरे धीरे लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बना रहा है। एक हालिया सर्वे में 35 प्रतिशत लोगों की पसंद बनकर डॉ पवन सक्सेना ने यह संकेत दिया है कि वे अब सिर्फ एक संभावित चेहरा नहीं बल्कि भरोसे का प्रतीक बनते जा रहे हैं। वहीं मौजूदा विधायक और मंत्री डॉ अरुण कुमार 44 प्रतिशत के साथ आगे हैं, लेकिन शहर में चर्चा उस बदलाव की है जो खामोशी से लोगों के मन में आकार ले रहा है।
यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है। शहर की गलियों, मोहल्लों और चौपालों में लोगों की बातचीत में एक अपनापन झलकता है। लोग कहते हैं कि वह सिर्फ मिलने नहीं आते बल्कि दिल से जुड़ते हैं। यही भाव किसी भी व्यक्ति को भीड़ से अलग पहचान देता है।
डॉ पवन सक्सेना का सफर भी उन्हें अलग खड़ा करता है। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने समाज के विभिन्न पहलुओं को करीब से समझा है। प्रेस क्लब बरेली के अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका और विभिन्न प्रतिष्ठित अखबारों में संपादकीय अनुभव ने उन्हें लोगों के बीच संवेदनशील और समझदार व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया है।
उनकी पहचान सिर्फ एक सार्वजनिक चेहरे की नहीं बल्कि ऐसे व्यक्ति की बनती जा रही है जो लोगों के सुख दुख में साथ खड़ा नजर आता है। यही वजह है कि उनके प्रति लोगों का विश्वास लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।
बरेली की राजनीति में लंबे समय से कुछ स्थापित चेहरे हावी रहे हैं, लेकिन इस बार माहौल में बदलाव के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं। सर्वे में बड़ी संख्या में लोगों का मौजूदा व्यवस्था से असंतोष इस बदलाव की ओर इशारा करता है।
आने वाला समय और चुनावी समीकरण क्या रूप लेते हैं यह भविष्य के गर्भ में है, लेकिन इतना साफ है कि बरेली में अब सियासत का मिजाज बदल रहा है। यहां अब केवल भाषण नहीं बल्कि रिश्तों और भरोसे की राजनीति अपनी जगह बना रही है।
इसी बदलते दौर में डॉ पवन सक्सेना एक ऐसे नाम के रूप में सामने आ रहे हैं जो सियासत को समाज से जोड़ने की कोशिश करता हुआ दिखाई देता है।