ब्रेन हेमरेज से बीएलओ की मौत: परिजन रो-रोकर बोले – फॉर्म फीडिंग के दबाव ने मार डाला, लाश नहीं उठाएंगे जब तक अधिकारी नहीं आएंगे
बरेली में बीएलओ अजय अग्रवाल की कथित फॉर्म फीडिंग दबाव के बीच ब्रेन हेमरेज से मौत; परिजनों ने अधिकारी बुलाए बिना अंतिम संस्कार से इनकार किया।
➡️ बीएलओ अजय अग्रवाल की ब्रेन हेमरेज से मौत
➡️ परिजनों का आरोप – “फॉर्म फीडिंग का दबाव मार गया”
➡️ अंतिम संस्कार से इनकार, अधिकारी बुलाने की मांग
➡️ लगातार 14–16 घंटे की ड्यूटी से हालत बिगड़ने का दावा
➡️ घर में मातम, स्थानीय लोगों में आक्रोश
➡️ सिटी मजिस्ट्रेट पहुंचे, जांच का आश्वासन दिया
हसीन दानिश/ जन माध्यम
बरेली। चुनाव ड्यूटी के नाम पर इंसान की जान ले ली गई! एमबी इंटर कॉलेज के व्यवसायिक शिक्षक और बीएलओ अजय अग्रवाल (50) की सोमवार देर रात ब्रेन हेमरेज से दर्दनाक मौत हो गई। परिजन चीख-चीख कर बता रहे हैं – दिन-रात फॉर्म भरवाने का इतना दबाव डाला गया कि वह टूट गया। आखिरी पलों में बार-बार यही चिल्ला रहा था – ‘मुझसे और फॉर्म नहीं भरे जाएंगे’… और फिर हमेशा के लिए चुप हो गया।”
इज्जतनगर के कर्मचारी नगर में मातम पसरा है। घर के बाहर लाश पड़ी है, लेकिन परिजन अंतिम संस्कार से इनकार कर रहे हैं। मां की आंखों से आंसू थम नहीं रहे, पत्नी बेहोश हो रही है, बच्चे बाप को पुकार-पुकार कर रो रहे हैं। परिवार का साफ कहना है – “जब तक कोई जिम्मेदार अधिकारी यहां आकर माफी नहीं मांगेगा, जांच का आश्वासन नहीं देगा, तब तक हम अपने अजय को अग्नि नहीं देंगे। ये हत्या है… चुनाव ड्यूटी के नाम पर हत्या।
परिजनों ने बताया कि पिछले कई दिनों से अजय लगातार 14-16 घंटे ड्यूटी कर रहा था। आईटीआई सेंटर पर फॉर्म फीडिंग का इतना दबाव था कि खाना-पीना, नींद सब छूट गई थी। घर आता तो थका-हारा, चिड़चिड़ा रहता। रविवार रात भी देर तक काम किया। सोमवार रात अचानक सीने में दर्द, घबराहट हुई। चीखा – मेरे से नहीं होगा… बहुत हो गया… और फिर गिर पड़ा। अस्पताल पहुंचते-पहुंचते उसने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों ने कहा – मासिव ब्रेन हेमरेज।
परिजनों का गुस्सा सातवें आसमान पर है – शिक्षक को बीएलओ बनाकर उसकी जान ले ली! क्या चुनाव सिर्फ हम गरीब-अध्यापकों के दम पर ही जीते जाते हैं? ऊपर वाले अफसर एसी में बैठकर हुक्म चलाते हैं और हमारे घर का चिराग बुझ जाता है। कोई पूछने तक नहीं आया।
सूचना मिलते ही उप जिला निर्वाचन अधिकारी ने सिटी मजिस्ट्रेट को रात में ही परिवार से मिलने भेजा। अधिकारी पहुंचे, सांत्वना दी, जांच का आश्वासन दिया, लेकिन परिवार का दर्द शांत नहीं हुआ। घर के बाहर लोग जमा हैं, गुस्सा है, आंसू हैं, सवाल हैं – आखिर कब तक चुनाव ड्यूटी के नाम पर शिक्षकों की बलि चढ़ती रहेगी?
अजय अग्रवाल शांत, मेहनती और कर्तव्यनिष्ठ शिक्षक थे। सहकर्मी रोते हुए बता रहे हैं – बहुत अच्छा इंसान था… कभी शिकायत नहीं की, लेकिन इस बार टूट गया था।
परिवार अब भी इंतज़ार कर रहा है… लाश ज़मीन पर है, आंसू आसमान छू रहे हैं और सवाल वही –
क्या किसी की जान की कीमत सिर्फ कुछ फॉर्म भरवाना है?
कब रुकेगी यह खून की होली?