वकीलों पर हमला न्याय की चौखट पर सवाल
बरेली में गाड़ी टक्कर के बाद दो वकीलों पर लोहे की रॉड से जानलेवा हमला। पुलिस ने हमलावरों को छोड़ा, वकीलों पर केस दर्ज। डीआईजी से शिकायत, आंदोलन की चेतावनी।
➡️ गाड़ी टक्कर के बाद दो वकीलों पर लोहे की रॉड से जानलेवा हमला
➡️ आरोपी आशीष सिंह और अमन पर एससी/एसटी एक्ट सहित गंभीर धाराएं
➡️ पुलिस ने हमलावरों को थाने से छोड़ा, वकीलों पर दर्ज किया मुकदमा
➡️ घायल अधिवक्ता बाबूराम और शकील हुसैन गंभीर
➡️ डीआईजी अजय कुमार सहनी को सौंपा ज्ञापन, निष्पक्ष जांच का भरोसा
➡️ हमलावर अभी भी दे रहे धमकियां, सुरक्षा की मांग
➡️ जल्द कार्रवाई न हुई तो वकील समाज सड़क से अदालत तक आंदोलन करेगा
पुलिस पर पक्षपात के आरोप, घायल अधिवक्ताओं का दर्द और गुस्सा दोनों उभरकर सामने
जन माध्यम
बरेली। शहर कोतवाली क्षेत्र की 18 नवंबर की यह घटना केवल एक झड़प नहीं, बल्कि अधिवक्ताओं के आत्मसम्मान पर पड़ा गहरा आघात है। न्याय का मार्ग दिखाने वाले वही लोग स्वयं अन्याय का शिकार बने, और दुखद यह कि पुलिस ने उनकी व्यथा सुनने के बजाय उन्हें ही आरोपों के घेरे में खड़ा कर दिया।
प्रगति नगर, थाना सुभाष नगर के रहने वाले आशीष सिंह और अमन का अधिवक्ताओं से विवाद तब शुरू हुआ जब दोनों ने अधिवक्ताओं की खड़ी गाड़ी में जानबूझकर टक्कर मार दी। जब अधिवक्ता बाबूराम और शकील हुसैन बीच-बचाव करने पहुँचे, तो दोनों युवकों ने अचानक लोहे की रॉड उठाकर उन पर प्रहार करना शुरू कर दिया। वार सीधे सिर और शरीर पर किए गए जैसे सामने कोई निर्दोष व्यक्ति नहीं, बल्कि कोई दुश्मन खड़ा हो।दोनों अधिवक्ता गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़े। उनके साथियों ने दौड़कर हमलावरों को पकड़ लिया और पुलिस को बुला लिया। हर कोई मान रहा था कि अब कानून अपनी गति से चलेगा, परन्तु जो हुआ वह और भी पीड़ादायक था।अधिवक्ताओं ने बताया कि घटना में अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम सहित गंभीर धाराएँ लागू की गई थीं, जहाँ अभियुक्तों को तुरंत जेल भेजना चाहिए था। परंतु पुलिस ने उन्हें थाने से ही जाने दिया। यह सुनकर अधिवक्ताओं में आक्रोश फैल गया।और फिर सीओ प्रथम द्वारा आश्वासन दिया गया था कि अधिवक्ताओं के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन उसके उलट पुलिस ने अधिवक्ताओं पर ही मुकदमा दर्ज कर दिया। यह घटनाक्रम अधिवक्ताओं के मन में गहरी पीड़ा और संस्था पर प्रश्नचिन्ह छोड़ गया। उन्होंने कहा हम तो न्याय के प्रहरी हैं, यदि हमारी आवाज़ को ही अनसुना कर दिया जाएगा, तो आम नागरिक का कौन साथ देगा?
अधिवक्ताओं का प्रतिनिधिमंडल डीआईजी से मिला घाव भी दिखाए, गुहार भी रखी घटना से क्षुब्ध अधिवक्ताओं का एक दल डीआईजी अजय कुमार सहनी से मिला। उनकी आवाज़ में दर्द भी था और न्याय की उम्मीद भी। उन्होंने ज्ञापन में माँग रखी दोनों हमलावरों को तुरंत गिरफ़्तार किया जाए।अधिवक्ताओं पर दर्ज किया गया मुकदमा वापस लिया जाए।इस पूरे मामले में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर दंडात्मक कार्रवाई हो।हमलावर युवकों द्वारा दी जा रही धमकियों से सुरक्षा की व्यवस्था की जाए।डीआईजी ने भरोसा दिलाया कि जांच निष्पक्ष होगी और दोषी चाहे कोई भी हो, उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।लेकिन वकील समाज का दर्द अभी शांत नहीं हुआ है। उनका कहना है कि हमलावर अब भी धमकियाँ दे रहे हैं और घायल अधिवक्ता अब भी न्याय की राह देख रहे हैं।अदालत परिसर में आज एक ही सवाल गूँजता रहा
क्या न्याय देने वालों को ही अन्याय सहने के लिए छोड़ दिया जाएगा?
अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई न हुई, तो वे सड़क से लेकर न्यायालय तक बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे।