हवाला के काले साम्राज्य पर एसएसपी का शिकंजा
एसएसपी अनुराग आर्य की सख्ती से फूटा आर्थिक गुनाहों का फोड़ा, 35 लाख नकद, फर्जी दस्तावेज और हवाला नेटवर्क का पर्दाफाश
बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक: बारादरी पुलिस और एसओजी टीम ने संयुक्त रूप से देश की अर्थव्यवस्था को खोखला करने वाले गिरोह को दबोचा।
दुबई से कनेक्शन: फर्जी कंपनियों के खातों में देश-विदेश से ट्रांसफर हो रही थी बैनामी रकम, टोकन सिस्टम से चल रहा था खेल।
फर्जी आईडी का खेल: पकड़े गए आरोपियों के पास से पहचान छिपाने के लिए तैयार किए गए फर्जी सरकारी दस्तावेज और मोबाइल बरामद।
जन माध्यम
बरेली। देश की आर्थिक व्यवस्था को दीमक की तरह चाटने वाले हवाला कारोबारियों के खिलाफ पुलिस ने ऐसा शिकंजा कसा है कि काले धन के सौदागरों में खलबली मच गई है। वर्षों से पर्दे के पीछे बैठकर बैनामी रुपयों का खेल खेलने वाले चेहरे अब कानून के कठघरे तक पहुंचने लगे हैं। एसएसपी अनुराग आर्य की अगुवाई में चल रही अपराध विरोधी मुहिम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो सबसे शातिर आर्थिक अपराधी भी कानून की गिरफ्त से दूर नहीं रह सकता। थाना बारादरी पुलिस और एसओजी टीम की संयुक्त कार्रवाई ने उस गोरखधंधे का भंडाफोड़ किया है, जो केवल टैक्स चोरी तक सीमित नहीं था, बल्कि जिसकी जड़ें संदिग्ध गतिविधियों तक फैली होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर 35 लाख रुपये की नकदी, फर्जी आधार कार्ड और मोबाइल फोन बरामद किए हैं। यह बरामदगी केवल नोटों का ढेर नहीं, बल्कि उस काले कारोबार का आईना है जो देश की आर्थिक सेहत को नुकसान पहुंचाने में लगा था। पुलिस जांच में सामने आया कि फर्जी कंपनी को हवाला के अड्डे में तब्दील कर दिया गया था। कंपनी के खाते में देश के अलग अलग जगहों से रकम डाली जाती थी और फिर उसे निकालकर टोकन सिस्टम के जरिए अज्ञात लोगों तक पहुंचाया जाता था। यह पूरा नेटवर्क इतना शातिराना ढंग से संचालित हो रहा था कि धन भेजने वाला और धन लेने वाला, दोनों एक दूसरे से अनजान रहते थे। गिरफ्तार आरोपी जमीर अहमद ने पूछताछ में जो खुलासे किए, उसने जांच एजेंसियों के कान खड़े कर दिए। दुबई में बैठे कथित मास्टरमाइंड जीशान अली के इशारे पर फर्जी कंपनी बनाई गई, बैंक खाते खोले गए और फिर उन खातों को काले धन के ट्रांजिट प्वाइंट में बदल दिया गया। लालच, कमीशन और आसान कमाई की चमक में कानून को ताक पर रख दिया गया। वहीं दूसरा आरोपी जगदीश चोटिया पिछले कई वर्षों से हवाला कारोबार का हिस्सा बना हुआ था। उसका काम केवल पैसा पहुंचाना नहीं था, बल्कि उस काली चेन को जिंदा रखना था जो देश की आर्थिक व्यवस्था के लिए खतरा बन चुकी थी। दिल्ली में बैठे उसके साथी लालचंद्र और धम्माराम इस नेटवर्क की दूसरी मजबूत कड़ी बताए जा रहे हैं। एसएसपी अनुराग आर्य के नेतृत्व में पुलिस ने पिछले कुछ समय में जिस तरह अपराधियों के खिलाफ लगातार मोर्चा खोला है, उसने अपराध जगत में बेचैनी बढ़ा दी है। अपराध चाहे सड़क का हो या सफेदपोश दुनिया का, बरेली पुलिस अब हर मोर्चे पर हमलावर नजर आ रही है। यही वजह है कि हवाला के इस खेल का पर्दाफाश केवल एक पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि आर्थिक अपराधियों के खिलाफ सख्त पैगाम माना जा रहा है।

यह भी कम गंभीर बात नहीं है कि आरोपियों के पास से फर्जी आधार कार्ड बरामद हुए हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि केवल हवाला ही नहीं, बल्कि पहचान छिपाने और जांच को गुमराह करने की पूरी तैयारी की गई थी। ऐसे में यह मामला और भी संवेदनशील हो जाता है। शहर के लोग मानते हैं कि अगर ऐसे नेटवर्क समय रहते न तोड़े जाएं तो ये केवल सरकारी राजस्व को ही नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा तक के लिए खतरा बन सकते हैं। यही कारण है कि इस कार्रवाई को आम नागरिक राहत की नजर से देख रहे हैं। एसएसपी अनुराग आर्य की कार्यशैली की चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि उन्होंने अपराध के खिलाफ केवल बयानबाजी नहीं की, बल्कि धरातल पर कार्रवाई करके दिखाया। उनके नेतृत्व में पुलिस की टीमें लगातार ऐसे नेटवर्क तलाश रही हैं जो पर्दे के पीछे बैठकर कानून और व्यवस्था को चुनौती देने का दुस्साहस करते हैं। आज जब हवाला के इस काले धंधे की एक परत खुली है, तो यह साफ है कि अभी कई और चेहरे बेनकाब होने बाकी हैं। फरार आरोपियों की तलाश जारी है और जांच की सुई अब उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है जो पर्दे के पीछे बैठकर इस पूरे खेल की कहानी लिख रहे थे। पुलिस की यह कार्रवाई एक संदेश है
जो लोग बैनामी दौलत, हवाला और फर्जीवाड़े के सहारे कानून को चुनौती देने का ख्वाब देखते हैं, उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि एसएसपी अनुराग आर्य के नेतृत्व में पुलिस की नजर अब केवल अपराधियों पर नहीं, बल्कि अपराध की जड़ों पर है। और जब कानून जागता है, तो हवाला के अंधेरे गलियारों में छिपे चेहरे भी उजाले में आ ही जाते हैं।