एक लाख का इनामी सरबजीत मुठभेड़ में ढेर
डीआईजी अजय कुमार साहनी और एसपी पीलीभीत के नेतृत्व में पुलिस की बड़ी सफलता, जवाबी कार्रवाई में ढेर हुआ कुख्यात; दो पुलिसकर्मी भी घायल
डीआईजी अजय कुमार साहनी और एसपी पीलीभीत के नेतृत्व में पुलिस का बड़ा ऑपरेशन, एक लाख का इनामी बदमाश मुठभेड़ में ढेर।
पुलिस पर जानलेवा फायरिंग का मुंहतोड़ जवाब, व्यापारी हत्याकांड के मुख्य आरोपी का हुआ अंत।
जन माध्यम
पीलीभीत। अपराध जब कानून को चुनौती देने लगे, तो जवाब भी कानून की चौखट से ही मिलता है। शनिवार देर रात पीलीभीत पुलिस ने एक ऐसे कुख्यात अपराधी का अंत कर दिया, जिसकी तलाश लंबे समय से पुलिस को थी। पुलिस के अनुसार, शनिवार देर रात्रि लगभग 10 बजे शीतलपुर मरोरी जंगल के पास पुलिस टीम संदिग्ध व्यक्तियों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान मोटरसाइकिल से आ रहे दो संदिग्धों को पुलिस ने रुकने का इशारा किया। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपियों ने रुकने के बजाय पुलिस टीम पर जानलेवा फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें एक बदमाश गोली लगने से घायल हो गया, जबकि उसका दूसरा साथी जंगल का फायदा उठाकर फरार हो गया। फरार आरोपी की तलाश में पुलिस की कई टीमें लगातार सर्च अभियान चला रही हैं। मुठभेड़ के दौरान बदमाशों की गोली से एक उपनिरीक्षक और एक मुख्य आरक्षी भी घायल हो गए। दोनों पुलिसकर्मियों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। घायल बदमाश को भी जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
मृतक की पहचान शिवम उर्फ सरबजीत के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, उसके विरुद्ध हत्या, गैंगस्टर एक्ट समेत लगभग एक दर्जन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। वह 28 मई को थाना बिलसंडा क्षेत्र में हुए चर्चित व्यापारी पप्पू गुप्ता हत्याकांड का भी प्रमुख आरोपी था। उसकी गिरफ्तारी पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था।
पुलिस ने उसके कब्जे से .32 बोर की सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल, .315 बोर सीएमपी और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए हैं। बरामद हथियारों को कब्जे में लेकर अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है। इस पूरी कार्रवाई में डीआईजी अजय कुमार साहनी और एसपी पीलीभीत के नेतृत्व को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके निर्देशन में जनपद में वांछित एवं इनामी अपराधियों के विरुद्ध लगातार प्रभावी अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि आम नागरिकों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए संगठित अपराध और वांछित अपराधियों के विरुद्ध अभियान आगे भी पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा।
यह मुठभेड़ केवल एक इनामी अपराधी के अंत की घटना नहीं, बल्कि उन पुलिसकर्मियों के साहस, कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण की भी कहानी है, जो हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर समाज में अमन, कानून और भरोसे को कायम रखने के लिए डटे रहते हैं। घायल पुलिसकर्मियों की बहादुरी इस बात की गवाही देती है कि वर्दी केवल अधिकार का प्रतीक नहीं, बल्कि कर्तव्य और बलिदान का दूसरा नाम भी है। पुलिस की यह कार्रवाई अपराधियों के लिए स्पष्ट संदेश है कि कानून से बच निकलने की हर कोशिश का अंत अंतत कानून के सामने ही होता है।