हाथरस में सट्टा किंग 'चतुरा' का खूंखार नेटवर्क! विष्णुपुरी सहित कई इलाकों में खुले अवैध 'सट्टा सेवा केंद्र
हाथरस जनपद में सट्टा कारोबारी सी.बी. गुप्ता उर्फ चतुरा के संरक्षण में अवैध सट्टे का नेटवर्क दोबारा सक्रिय होने की चर्चाएं हैं। विष्णुपुरी समेत कई क्षेत्रों में खुलेआम गली, दिसावर और फरीदाबाद सट्टा संचालित हो रहा है।
सट्टा माफिया की वापसी: पुराने सट्टा किंग सी.बी. गुप्ता उर्फ 'चतुरा' के संरक्षण में हाथरस में दोबारा अवैध सट्टा सिंडिकेट सक्रिय होने के संगीन आरोप।
सट्टा सेवा केंद्र: विष्णुपुरी समेत शहर के कई मोहल्लों में संगठित रूप से चल रहे हैं अवैध केंद्र; 'गली', 'दिसावर' और 'फरीदाबाद' के नाम पर दिनभर लग रही है बाजी।
पुराना क्रिमिनल रिकॉर्ड: तत्कालीन चर्चित एसपी सुभाष चंद्र दुबे के कार्यकाल में भी 'चतुरा' के खिलाफ पुलिस ने की थी बड़ी जेल भेजने की कार्रवाई।
जन माध्यम
हाथरस। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ चलाए जा रहे कड़े 'जीरो टॉलरेंस' अभियान के दावों के बीच, हाथरस जनपद में अवैध सट्टे के काले कारोबार का एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा नेटवर्क दोबारा सिर उठाने लगा है। स्थानीय जागरूक नागरिकों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि शहर के विभिन्न संवेदनशील और रिहायशी इलाकों में अवैध सट्टे का जाल मकड़ी की तरह तेजी से फैल चुका है। इस अवैध कारोबार को और अधिक संगठित करने के लिए बाकायदा 'सट्टा सेवा केंद्र' तक संचालित किए जा रहे हैं। इन तमाम अवैध गतिविधियों के केंद्र में एक पुराना और बेहद कुख्यात नाम—सी.बी. गुप्ता उर्फ 'चतुरा' का नाम एक बार फिर तेजी से फिजाओं में तैर रहा है।
स्थानीय नागरिकों और चश्मदीदों से मिली जानकारी के अनुसार, शहर के पॉश और व्यस्ततम इलाकों में शुमार 'विष्णुपुरी' क्षेत्र वर्तमान में सट्टेबाजों का मुख्य गढ़ बन चुका है। यहां स्थित एक कथित 'सट्टा सेवा केंद्र' पर सुबह से लेकर देर रात तक संदिग्ध असामाजिक तत्वों और जुआरियों की भारी आवाजाही लगी रहती है। जानकारों का कहना है कि यह अवैध कारोबार अब किसी बंद कमरे या छिपकर किए जाने वाले दायरे से बाहर निकलकर पूरी तरह एक कॉर्पोरेट सिंडिकेट का संगठित स्वरूप ले चुका है। यहां दिन में कई-कई बार अलग-अलग सट्टा किंग कंपनियों के नामों का ड्रा खोला जाता है, जिनमें मुख्य रूप से 'गली', 'दिसावर' और 'फरीदाबाद' जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इस दलदल में शहर का सबसे कमजोर मजदूर वर्ग और स्कूल-कॉलेज जाने वाले कम उम्र के युवा तेजी से फंसकर अपनी गाढ़ी कमाई गंवा रहे हैं।
सट्टे के इस काले साम्राज्य का इतिहास खंगालने वाले जानकारों के अनुसार, सी.बी. गुप्ता उर्फ चतुरा का सट्टा नेटवर्क कोई नया नहीं है। हाथरस में जब कड़क आईपीएस अधिकारी सुभाष चंद्र दुबे पुलिस अधीक्षक (SP) के पद पर तैनात थे, तब उन्होंने जनपद को अपराध मुक्त करने के लिए सट्टा माफियाओं के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ा था। उस दौरान 'चतुरा' को मुख्य सरगना के रूप में चिन्हित कर उसके विरुद्ध कठोर दंडात्मक और विधिक कार्रवाई करते हुए जेल की सलाखों के पीछे भेजा गया था। लेकिन, जेल से बाहर आते ही और समय बीतने के साथ उसका नाम एक बार फिर से सट्टे के सिंडिकेट को पुनर्जीवित करने के मामले में सामने आने लगा है, जिससे स्थानीय पुलिस और खुफिया तंत्र (LIU) की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
शहर के विभिन्न सामाजिक संगठनों, प्रबुद्ध नागरिकों और शिकायतकर्ताओं का स्पष्ट रूप से मानना है कि सट्टे की इस सामाजिक बुराई को केवल पर्ची लिखने वाले या छोटे स्तर के 'लाइनमैन' सटोरियों को पकड़कर खत्म नहीं किया जा सकता। इसके लिए पुलिस प्रशासन को इसके मूल संचालकों, फाइनेंसरों और खाकी व खादी के उन सफेदपोशों तक पहुंचना होगा जो इस नेटवर्क को कथित रूप से अभयदान और संरक्षण प्रदान कर रहे हैं।
यदि समय रहते इस संगठित सिंडिकेट पर बुलडोजर नहीं चलाया गया, तो हाथरस के सैकड़ों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की आर्थिक स्थिति पूरी तरह तबाह हो जाएगी। अब देखना यह है कि प्रदेश सरकार की सख्त हिदायतों के बाद हाथरस का पुलिस-प्रशासन इस पुराने सट्टा किंग 'चतुरा' के कथित साम्राज्य पर क्या और कितनी बड़ी कार्रवाई अमल में लाता है।