बरेली: डॉ. खालिक अंसारी और डॉ. तनीम साबिर ने सिखाए जीवन बचाने के गुर, सीपीआर ट्रेनिंग और रक्तदान शिविर संपन्न

गोल्ड्स जिम और रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में सीपीआर प्रशिक्षण और रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें फिटनेस प्रोफेशनल्स को आपातकालीन जीवन रक्षक तकनीक सिखाई गई।

बरेली: डॉ. खालिक अंसारी और डॉ. तनीम साबिर ने सिखाए जीवन बचाने के गुर, सीपीआर ट्रेनिंग और रक्तदान शिविर संपन्न
बरेली में आयोजित सीपीआर प्रशिक्षण और रक्तदान शिविर के सफल समापन पर सर्टिफिकेट्स के साथ ग्रुप फोटो खिंचवाते प्रतिभागी और डॉक्टर्स।
HIGHLIGHTS:

जीवन रक्षक तकनीक: रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज के डॉ. खालिक अंसारी और डॉ. तनीम साबिर ने डमी मॉडल के जरिए दिया लाइव सीपीआर डेमोंस्ट्रेशन।

महादान की मुहिम: प्रशिक्षण के साथ-साथ आयोजित रक्तदान शिविर में युवाओं और फिटनेस प्रोफेशनल्स ने बढ़-चढ़कर किया स्वेच्छा से रक्तदान।

बरेली। स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक उत्तरदायित्व को समर्पित एक सराहनीय पहल के तहत शनिवार को गोल्ड्स जिम बरेली एवं रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) प्रशिक्षण कार्यक्रम और रक्तदान शिविर का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. खालिक अंसारी और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. तनीम साबिर रहे, जिन्होंने प्रतिभागियों को आपातकालीन परिस्थितियों में जीवन बचाने वाली महत्वपूर्ण तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।

हार्ट अटैक और आपात स्थिति में संजीवनी है सीपीआर

इस विशेष प्रशिक्षण सत्र में शहर के विभिन्न जिमों के प्रशिक्षक (ट्रेनर्स), फिटनेस प्रोफेशनल्स, खिलाड़ी और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक युवाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। सीपीआर प्रशिक्षण के दौरान डॉ. खालिक अंसारी और डॉ. तनीम साबिर ने हृदय गति रुकने (कार्डियक अरेस्ट) या अचानक सांस बंद होने जैसी गंभीर आपात स्थितियों में तत्काल सहायता प्रदान करने के वैज्ञानिक तरीकों को विस्तार से समझाया। डॉक्टरों की टीम ने डमी मॉडल पर लाइव डेमोंस्ट्रेशन देकर सभी को चेस्ट कंप्रेशन और कृत्रिम सांस देने की सही प्रक्रिया का अभ्यास कराया।

शुरुआती कुछ मिनट होते हैं बेहद कीमती: विशेषज्ञ

विशेषज्ञ डॉक्टरों ने जोर देकर कहा कि किसी भी हादसे या साइलेंट अटैक की स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट (गोल्डन ऑवर) बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि एम्बुलेंस आने से पहले मरीज को सही तरीके से सीपीआर मिल जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। डॉक्टरों के इस व्यावहारिक मार्गदर्शन से वहां मौजूद युवाओं में प्राथमिक चिकित्सा को लेकर एक नया आत्मविश्वास देखने को मिला।

रक्तदान शिविर में युवाओं ने दिखाया जबरदस्त उत्साह

प्रशिक्षण के साथ-साथ कलेक्ट्रेट और स्वास्थ्य मानकों को ध्यान में रखते हुए एक स्वैच्छिक रक्तदान शिविर भी लगाया गया। इसमें जिम से जुड़े युवाओं और संभ्रांत नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और मानवता की सेवा के लिए रक्तदान किया। कार्यक्रम के समापन पर प्रशिक्षण पूरा करने वाले सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण पत्र (Certificate of Participation) देकर सम्मानित किया गया।

गोल्ड्स जिम बरेली प्रबंधन ने रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज की टीम, स्वयंसेवकों और सभी रक्तदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्था केवल शारीरिक फिटनेस ही नहीं, बल्कि सामाजिक स्वास्थ्य और जनसेवा की भावना को मजबूत करने के लिए ऐसे रचनात्मक आयोजन लगातार करती रहेगी।