वर्दी और कलम के बीच घुला होली का रंग

बरेली जोन कार्यालय में एडीजी रमित शर्मा की पहल पर फूलों की होली का आयोजन हुआ। वरिष्ठ अधिकारियों और पत्रकारों की मौजूदगी में सौहार्दपूर्ण माहौल बना, जिससे पुलिस और मीडिया के बीच संवाद व विश्वास के रिश्ते और मजबूत हुए।

वर्दी और कलम के बीच घुला होली का रंग
HIGHLIGHTS:

जोन कार्यालय में फूलों की होली

एडीजी की पहल से बढ़ा संवाद

पुलिस-मीडिया रिश्तों में आत्मीयता

सौहार्द और पारदर्शिता का संदेश

जन माध्यम 
बरेली।
रंगों का त्योहार होली जब दस्तक देता है, तो केवल चेहरों पर नहीं, दिलों पर भी रंग चढ़ते हैं। इस बार  एडीजी जोन कार्यालय में जो तस्वीर देखने को मिला, वह सिर्फ एक पारंपरिक होली मिलन समारोह नहीं था, बल्कि विश्वास, संवाद और संवेदनशील नेतृत्व की  मिसाल थी । यहां गुलाल से अधिक रिश्ते रंगे, और फूलों की वर्षा के साथ एक नई अपनापन ने जन्म लिया। जोन कार्यालय का प्रांगण उस दिन प्रशासनिक सख्ती के बजाय सौहार्द की मधुर आभा से भरा हुआ था। एडीजी रमित शर्मा ने स्वयं आगे बढ़कर पत्रकारों और अधिकारियों के साथ फूलों की होली खेली। उन्होंने हर व्यक्ति को गले लगाकर शुभकामनाएं दीं। वह क्षण केवल औपचारिकता नहीं था  वह इस बात का प्रतीक था कि वर्दी के भीतर भी एक संवेदनशील हृदय धड़कता है। होली मिलन समारोह में डीआईजी अजय कुमार साहनी, एसएसपी अनुराग आर्य, एसपी नॉर्थ मुकेश चंद्र मिश्रा, एसपी सिटी मानुष पारीक, एसपी दक्षिणी अंशिका वर्मा और एसपी ट्रैफिक मोहम्मद अकमल खान सहित अनेक आईपीएस व पीपीएस अधिकारी उपस्थित रहे। जिले के विभिन्न थानों और सर्किलों से आए अधिकारी और बड़ी संख्या में पत्रकार भी इस आयोजन का हिस्सा बने। उस समय न कोई सवाल था, न कोई जवाब सिर्फ रंग, मुस्कान और आपसी सम्मान का वातावरण था। एडीजी रमित शर्मा का नेतृत्व लंबे समय से संतुलन की मिसाल रहा है। एक ओर कानून व्यवस्था पर उनकी सख्त पकड़ है, तो दूसरी ओर समाज के हर वर्ग से संवाद बनाए रखने की प्रतिबद्धता भी। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि पुलिस और मीडिया दोनों लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। पुलिस जहां सुरक्षा और व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाती है, वहीं मीडिया समाज की आवाज बनकर सच को सामने लाता है। यदि दोनों के बीच विश्वास और संवाद कायम रहे, तो व्यवस्था और अधिक पारदर्शी और मजबूत बनती है।
उनके शब्दों में केवल औपचारिक भाषण नहीं, बल्कि अनुभव और संवेदनशीलता की गूंज थी। उन्होंने कहा कि त्योहार हमें जोड़ने का अवसर देते हैं। जब संवाद के रास्ते खुले रहते हैं, तो मतभेद भी मधुर संवाद में बदल जाते हैं। यही लोकतांत्रिक समाज की खूबसूरती है। एसएसपी अनुराग आर्य ने भी अपने संबोधन में इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन आपसी समझ और सहयोग को नई ऊर्जा देते हैं। उन्होंने माना कि पुलिस और मीडिया का रिश्ता कई बार चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से गुजरता है, लेकिन यदि संवाद कायम रहे, तो हर चुनौती अवसर में बदल सकती है। पत्रकारों ने भी इस आयोजन को सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि इससे पारदर्शिता और विश्वास की भावना मजबूत होती है। इस होली मिलन समारोह की सबसे खास बात थी उसकी सादगी और गरिमा। फूलों से खेली गई होली ने यह संदेश दिया कि उत्सव उल्लास का हो सकता है, लेकिन उसमें मर्यादा और संवेदनशीलता भी होनी चाहिए। एडीजी रमित शर्मा ने अपने जोन के अधिकारियों की सराहना करते हुए कहा कि टीमवर्क और अनुशासन किसी भी सफल आयोजन की रीढ़ होते हैं। कार्यक्रम के दौरान कई ऐसे क्षण आए जब हंसी की हल्की फुहारें वातावरण में गूंज उठीं। आर बी लाल वरिष्ठ पत्रकार ने मुस्कुराते हुए कहा,  आज सवालों की जगह सिर्फ शुभकामनाएं हैं। इस पर सभी ने ठहाका लगाया, और उस पल में वर्दी और कलम के बीच की दूरी पूरी तरह मिटती नजर आई।
यह आयोजन केवल रंगों का उत्सव नहीं था, बल्कि उस विश्वास का उत्सव था जो प्रशासन और मीडिया के बीच मजबूत होना चाहिए। एडीजी रमित शर्मा ने अपने आचरण से यह साबित किया कि सच्चा नेतृत्व केवल आदेश देने में नहीं, बल्कि लोगों को साथ लेकर चलने में है। उनकी यह पहल दर्शाती है कि कानून की सख्ती और रिश्तों की गर्माहट साथ साथ चल सकती है। समारोह के अंत में जब सभी ने एक दूसरे को शुभकामनाएं दीं, तो चेहरे भले ही रंगों से सराबोर थे, लेकिन आंखों में विश्वास की चमक थी। यह होली इस संदेश के साथ संपन्न हुई कि संवाद और सहयोग ही लोकतंत्र की असली ताकत हैं। बरेली की इस रंगभरी दोपहर ने यह साबित कर दिया कि जब नेतृत्व संवेदनशील हो, तो हर आयोजन एक मिसाल बन जाता है।रंग सूख जाएंगे, गुलाल हवा में बिखर जाएगा, लेकिन इस दिन का संदेश लंबे समय तक याद रखा जाएगा विश्वास के रंग सबसे गहरे होते हैं, और जब वे दिलों पर चढ़ते हैं, तो समाज और भी मजबूत हो जाता है।