मथुरा: कलेक्ट्रेट और तहसीलों में वर्षों से एक ही सीट पर जमे 'बाबू', ट्रांसफर सीजन में जुगाड़बाजी तेज
मथुरा कलेक्ट्रेट और तहसीलों में कई कर्मचारी वर्षों से एक ही पटल पर जमे हुए हैं। ट्रांसफर सीजन शुरू होते ही पसंदीदा जगहों पर तैनाती और तबादला रुकवाने के लिए जुगाड़बाजी का खेल शुरू हो गया है।
कुर्सी से मोह: अधिकारी बदल जाते हैं लेकिन कलेक्ट्रेट और तहसीलों में कई बाबू वर्षों से एक ही पटल पर कुंडली मारकर बैठे हैं.
सेटिंग-गेटिंग का खेल: ट्रांसफर होने पर भी रसूख के दम पर आदेश रुकवाने या उसी कुर्सी पर सम्बद्ध (Attach) होने का आरोप.
लेखपालों की भी जुगाड़: महावन तहसील के कई लेखपाल मनपसंद सदर तहसील में ट्रांसफर कराने के लिए अफसरों की परिक्रमा में जुटे
मथुरा। उत्तर प्रदेश में इन दिनों तबादलों का दौर (ट्रांसफर सीजन) चल रहा है। इसी के साथ ही कान्हा की नगरी मथुरा के प्रशासनिक गलियारों में भी अपनी मनपसंद कुर्सियों को बचाने और मलाईदार पटलों पर तैनाती पाने के लिए जुगाड़तंत्र सक्रिय हो गया है। जनपद के कलेक्ट्रेट और विभिन्न तहसीलों में सालों से एक ही सीट पर जमे बाबू (लिपिक) और कर्मचारी किसी भी कीमत पर अपनी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
अधिकारी बदल जाते हैं, पर नहीं बदलती बाबुओं की सीट
स्थानीय लोगों और पीड़ित जनता का आरोप है कि मथुरा में बड़े-बड़े प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले हो जाते हैं, लेकिन कलेक्ट्रेट और तहसीलों के बाबुओं की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता। कई कर्मचारी तो ऐसे हैं जो वर्षों से एक ही पटल पर कार्यरत हैं। यदि शासन स्तर की तबादला नीति के तहत कभी इनका ट्रांसफर हो भी जाता है, तो ये अपनी 'सेटिंग-गेटिंग' के दम पर या तो ट्रांसफर रुकवा लेते हैं या फिर उसी पुरानी कुर्सी के लिए खुद को सम्बद्ध (अटैच) करवा लेते हैं। कुछ अधिकारी भी अपनी सहूलियत के लिए अपने पसंदीदा बाबू को अपने साथ ही बनाए रखते हैं।
जनता परेशान, पारदर्शिता पर उठ रहे गंभीर सवाल
एक ही सीट पर लंबे समय तक कर्मचारियों की तैनाती से सरकारी विभागों की निष्पक्षता और पारदर्शिता पूरी तरह प्रभावित हो रही है। राजस्व संबंधी फाइलों, जमीनी विवादों और अन्य सरकारी कामों में बाबुओं की मनमानी और जानबूझकर देरी करने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, जिससे आम जनता को भारी मानसिक व आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ती है। प्रशासनिक विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस तरह का नेक्सस सरकारी कार्यप्रणाली की साख को बट्टा लगाता है।
तहसील बदलने की होड़, लेखपालों ने भी लगाया जोर
इस ट्रांसफर सीजन में केवल कलेक्ट्रेट के बाबू ही नहीं, बल्कि राजस्व विभाग के लेखपाल भी पीछे नहीं हैं। चर्चा है कि महावन तहसील में तैनात कई लेखपाल इस समय अपनी तहसील बदलवाकर 'सदर तहसील' में ट्रांसफर पाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। तमाम कर्मचारी कोई न कोई निजी बहाना बनाकर हर दिन जिलाधिकारी से मुलाकात करने की फिराक में रहते हैं।
मथुरा की जनता अब यह मांग कर रही है कि कलेक्ट्रेट और तहसीलों में वर्षों से जमे ऐसे सभी कर्मचारियों का गहन सत्यापन किया जाए और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उनका पटल तुरंत बदला जाए। अब देखना यह होगा कि क्या जिले के उच्च अधिकारी इन जुगाड़बाज बाबुओं के सिंडिकेट को तोड़ पाते हैं या व्यवस्था यूं ही ढर्रे पर चलती रहेगी।