वायरल नहीं, जिम्मेदार बनेगा सोशल मीडिया, एडीजी 

डिजिटल दुनिया के असर को समझते हुए पुलिस और सोशल मीडिया एक मंच पर आए

वायरल नहीं, जिम्मेदार बनेगा सोशल मीडिया, एडीजी 
वायरल नहीं, जिम्मेदार बनेगा सोशल मीडिया, एडीजी 
वायरल नहीं, जिम्मेदार बनेगा सोशल मीडिया, एडीजी 
वायरल नहीं, जिम्मेदार बनेगा सोशल मीडिया, एडीजी 
वायरल नहीं, जिम्मेदार बनेगा सोशल मीडिया, एडीजी 
HIGHLIGHTS:

एडीजी रमित शर्मा और एसएसपी अनुराग आर्य की पहल बनी मिसाल,

युवाओं को दिया जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने का संदेश,

फेक खबरों और साइबर अपराधों पर चला जागरूकता का बड़ा अभियान

जन माध्यम 
बरेली। आज के दौर में मोबाइल की छोटी सी स्क्रीन पूरे समाज की सोच बदलने की ताकत रखती है। एक वीडियो लोगों को जागरूक भी कर सकता है और एक झूठी पोस्ट माहौल बिगाड़कर समाज में तनाव भी फैला सकती है। यही वजह है कि पुलिस ने सोशल मीडिया की ताकत को सिर्फ मनोरंजन तक सीमित न रखते हुए उसे सामाजिक जिम्मेदारी और जनजागरूकता से जोड़ने की बड़ी पहल की। पुलिस लाइन स्थित रविन्द्रालय में आयोजित सोशल मीडिया रचनाकार सम्मेलन ने यह साबित कर दिया कि अगर पुलिस और डिजिटल दुनिया साथ आ जाएं तो समाज में सकारात्मक बदलाव की मजबूत नींव रखी जा सकती है।
जोन के विभिन्न जिलों से पहुंचे सोशल मीडिया रचनाकारों, डिजिटल वालंटियर्स और युवा कंटेंट निर्माताओं ने सम्मेलन में बढ़ चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम में साइबर अपराध, फर्जी सूचनाएं, डिजिटल ठगी, महिला सुरक्षा, यातायात नियम, सड़क सुरक्षा और जिम्मेदार डिजिटल नागरिकता जैसे गंभीर विषयों पर खुलकर चर्चा हुई। सम्मेलन का उद्देश्य साफ था  सोशल मीडिया को सनसनी नहीं, समाज सुधार का हथियार बनाना।
एडीजी रमित शर्मा ने बेहद प्रभावशाली अंदाज में कहा कि आज सोशल मीडिया केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज की दिशा तय करने वाला शक्तिशाली मंच बन चुका है। उन्होंने कहा कि डिजिटल मंचों पर सक्रिय युवाओं की जिम्मेदारी अब पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। एक जिम्मेदार पोस्ट समाज को जागरूक कर सकती है, जबकि एक झूठी खबर पूरे माहौल को बिगाड़ सकती है। उन्होंने डिजिटल वालंटियर्स कार्यक्रम को पुलिस और समाज के बीच भरोसे का मजबूत पुल बताया। एसएसपी अनुराग आर्य ने भी सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर गंभीर चिंता जताते हुए साफ संदेश दिया कि बिना सत्यता जांचे किसी भी सूचना को साझा करना खतरनाक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग प्रसिद्धि और वायरल होने की होड़ में समाज में भ्रम फैलाने वाली सामग्री प्रसारित कर देते हैं, जिसका असर कानून व्यवस्था तक पर पड़ता है। एसएसपी ने सोशल मीडिया रचनाकारों से अपील की कि वे अपने मंच का इस्तेमाल समाज को जागरूक करने, कानून का सम्मान बढ़ाने और सकारात्मक संदेश फैलाने के लिए करें।
साइबर अपराधों पर प्रस्तुति देते हुए अपर पुलिस अधीक्षक विक्रम दहिया ने बताया कि किस तरह ऑनलाइन ठगी, फर्जी लिंक, डिजिटल गिरफ्तारी और सोशल मीडिया हैकिंग के जरिए अपराधी आम लोगों को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने लोगों को सतर्क रहने और साइबर हेल्पलाइन का उपयोग करने के बारे में विस्तार से जानकारी दी। यातायात और सड़क सुरक्षा पर अपर पुलिस अधीक्षक मनोज रावत ने कहा कि सोशल मीडिया पर स्टंट और लापरवाही को दिखावा बनाना युवाओं को गलत दिशा में धकेल रहा है। उन्होंने हेलमेट और सीट बेल्ट को जिंदगी की सुरक्षा कवच बताते हुए नियमों का पालन करने की अपील की। महिला सुरक्षा और संवेदनशील सामाजिक मुद्दों पर सहायक पुलिस अधीक्षक सोनाली मिश्रा ने विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर महिलाओं से जुड़े विषयों को सम्मान और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करना बेहद जरूरी है। वहीं डॉ. नताशा गोयल और शिवम आशुतोष ने नए कानूनों, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और डिजिटल कंटेंट से जुड़े कानूनी पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। सम्मेलन में मौजूद युवाओं और कंटेंट निर्माताओं ने भी माना कि सोशल मीडिया का असली उद्देश्य केवल लोकप्रियता हासिल करना नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए। पुलिस की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें, भ्रामक वीडियो और नफरत फैलाने वाली सामग्री तेजी से बढ़ रही है। ऐसे माहौल में यह सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि डिजिटल समाज को नई दिशा देने वाला मजबूत संदेश बनकर आया है।