चार साल की सुस्ती पर बीडीए का डंडा
आठ बार मोहलत के बाद भी अधूरा रहा कन्वेंशन सेंटर, सत्य साईं बिल्डर्स डिबार
रामगंगा नगर में वर्षों से अधूरी पड़ी कन्वेंशन सेंटर परियोजना पर बीडीए (BDA) ने लिया बड़ा फैसला।
4 साल तक बहानों और अधूरे दावों के सहारे चल रही कार्यदायी संस्था सत्य साईं बिल्डर्स को किया डिबार।
8 बार मोहलत देने, 5 बार जुर्माना लगाने और कई नोटिस जारी होने के बाद भी एजेंसी ने दिखाई लापरवाही।
जन माध्यम
बरेली। शहर के विकास की रफ्तार को अपनी सुस्ती की जंजीरों में जकड़ने वाले ठेकेदारों के लिए बीडीए का ताजा कदम किसी कड़े इशारे से कम नहीं है। रामगंगा नगर में वर्षों से अधूरी पड़ी कन्वेंशन सेंटर परियोजना पर आखिरकार बीडीए ने वह फैसला लिया, जिसका इंतजार आम लोग लंबे समय से कर रहे थे। चार साल तक बहानों, वादों और अधूरे दावों के सहारे चल रही कार्यदायी संस्था सत्य साईं बिल्डर्स एंड कांट्रेक्टर को बीडीए ने डिबार कर दिया है।
यह कार्रवाई केवल एक ठेकेदार के खिलाफ प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि उन तमाम एजेंसियों के लिए खुला पैगाम है जो सरकारी परियोजनाओं को अपनी जागीर समझकर जनता के ख्वाबों के साथ खिलवाड़ करती हैं। बीडीए उपाध्यक्ष ने साफ कर दिया है कि अब विकास कार्यों में लापरवाही, ढिलाई और गैर जिम्मेदाराना रवैया किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। करीब 29 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह कन्वेंशन सेंटर रामगंगा नगर की शान बनने वाला था। यहां आधुनिक ऑडिटोरियम, स्वीमिंग पूल, गेस्ट रूम, विशाल पार्किंग और तमाम अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जानी थीं। लेकिन अफसोस, जिस परियोजना को शहर की तरक्की का नया चेहरा बनना था, वह ठेकेदार की सुस्ती और लापरवाही की भेंट चढ़ती रही। हैरानी की बात यह है कि बीडीए ने संस्था को एक दो नहीं बल्कि आठ बार मोहलत दी। पांच बार जुर्माना लगाया गया, कई नोटिस जारी हुए, बार बार चेतावनी दी गई, मगर एजेंसी के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। ऐसा लगता रहा मानो सरकारी आदेशों की कोई अहमियत ही न हो। आखिरकार जब सब्र का बांध टूटा तो बीडीए ने सख्त फैसला लेते हुए संस्था को डिबार कर दिया।
बीडीए वीसी का यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि अक्सर सरकारी परियोजनाओं में देरी के बावजूद जिम्मेदार एजेंसियां बच निकलती हैं। मगर इस बार तस्वीर अलग दिखी। यहां न कोई रियायत मिली, न कोई नया बहाना स्वीकार किया गया। जनता के पैसों और शहर के विकास के साथ हो रही ताखीर पर प्राधिकरण ने सख्त ऐक्शन लेकर यह साबित कर दिया कि जवाबदेही केवल कागजों की बात नहीं है। शहर के जानकारों का मानना है कि यह फैसला उन लोगों के लिए करारा जवाब है जो सरकारी कामों को सालों तक लटकाकर रखते हैं और फिर भी कार्रवाई से बचने की उम्मीद करते हैं। बीडीए ने साफ शब्दों में बता दिया है कि विकास की राह में रोड़ा बनने वालों के लिए अब नरमी नहीं, बल्कि कार्रवाई का कोड़ा तैयार है।
असल मायनों में यह कदम केवल एक परियोजना को पटरी पर लाने की कोशिश नहीं, बल्कि प्रशासनिक अनुशासन की नई इबारत है। बीडीए वीसी ने यह संदेश दे दिया है कि जनता के अरमानों, शहर की जरूरतों और विकास की रफ्तार को बंधक बनाने वालों के खिलाफ अब फैसला फाइलों में नहीं, मैदान में दिखाई देगा। रामगंगा नगर का अधूरा कन्वेंशन सेंटर आज एक सवाल जरूर खड़ा करता है, लेकिन बीडीए की कार्रवाई यह उम्मीद भी जगाती है कि अब विकास के रास्ते में खड़ी लापरवाही की हर दीवार पर जवाबदेही की चोट पड़ने वाली है।