खाकी की मेहनत को मिला सलाम
एसएसपी अनुराग आर्य ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले 10 चौकी प्रभारियों को किया सम्मानित
प्रशस्ति पत्र, नकद पुरस्कार और जवाबदेही की मिसाल से पुलिस महकमे में बढ़ा उत्साह
बरेली। अक्सर पुलिस की वर्दी को लोग केवल सख्ती और कार्रवाई के नजरिए से देखते हैं, लेकिन इस वर्दी के भीतर भी एक ऐसा इंसान होता है जो अपने परिवार से दूर रहकर, दिन रात जनता की सुरक्षा के लिए समर्पित रहता है। तपती दोपहरी हो या सर्द रातें, त्योहारों की खुशियां हों या परिवार की जरूरतें, एक पुलिसकर्मी हमेशा अपनी जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देता है। ऐसे कर्मठ और समर्पित पुलिसकर्मियों की मेहनत को पहचान देने का काम किया है एसएसपी अनुराग आर्य ने।
एसएसपी द्वारा शुरू की गई मासिक मूल्यांकन प्रणाली आज पुलिस विभाग में नई ऊर्जा का संचार कर रही है। अप्रैल के मूल्यांकन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 10 चौकी प्रभारियों को सम्मानित कर उन्होंने यह संदेश दिया कि खामोशी से अच्छा काम करने वालों की मेहनत कभी अनदेखी नहीं होती। जब चौकी जोगीनवादा के प्रभारी कुशलपाल सिंह को प्रथम स्थान के साथ सम्मानित किया गया, तो वह केवल एक अधिकारी की उपलब्धि नहीं थी, बल्कि उन अनगिनत रातों की मेहनत का सम्मान था जो उन्होंने जनता की सुरक्षा में बिताई थीं। इसी तरह अन्य सम्मानित चौकी प्रभारियों के चेहरों पर भी गर्व और संतोष साफ दिखाई दे रहा था। यह सम्मान उनके लिए केवल नकद पुरस्कार नहीं, बल्कि उनके कर्तव्यनिष्ठ जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बन गया। एसएसपी अनुराग आर्य की इस पहल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहां केवल पुरस्कार नहीं बांटे गए, बल्कि पुलिसिंग की एक नई संस्कृति विकसित की गई है। ऐसी संस्कृति जिसमें ईमानदारी, जवाबदेही और जनसेवा को सबसे ऊपर रखा गया है। जो अच्छा काम करेगा, उसे सम्मान मिलेगा और जो अपने कर्तव्यों से विमुख होगा, उससे जवाब भी मांगा जाएगा।
न्यूनतम प्रदर्शन करने वाले चौकी प्रभारियों को चेतावनी जारी कर एसएसपी ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि पुलिस विभाग में अब केवल कुर्सी नहीं, बल्कि कार्य ही पहचान बनेगा। यह निर्णय उन लाखों नागरिकों की उम्मीदों को मजबूत करता है जो पुलिस से संवेदनशील और प्रभावी व्यवस्था की अपेक्षा रखते हैं। पुलिसकर्मी अक्सर तब याद किए जाते हैं जब कोई घटना हो जाती है, लेकिन उनके अच्छे कार्यों की चर्चा कम होती है। अनुराग आर्य ने इस परंपरा को बदलने का प्रयास किया है। उन्होंने उन खामोश सिपाहियों और अधिकारियों को मंच दिया है जो बिना किसी प्रशंसा की उम्मीद के अपना फर्ज निभाते रहते हैं।
आज जिले की पुलिस का सम्मान और जवाबदेही का जो संतुलन दिखाई दे रहा है, वह एक मजबूत नेतृत्व की पहचान है। अनुराग आर्य का यह प्रयास केवल पुरस्कार वितरण कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन खाकीधारियों के सपनों, संघर्षों और समर्पण को सलाम करने का अवसर है, जो हर दिन जनता की सुरक्षा के लिए अपने सुख दुख कुर्बान कर देते हैं। वास्तव में, जब एक अधिकारी अपने अधीनस्थों की मेहनत को पहचानता है, तो वह केवल पुरस्कार नहीं देता, बल्कि उनके हौसलों को नई जिंदगी देता है।