बिजली दरों और विभागीय नीतियों के विरोध में व्यापारियों का प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

बरेली में उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश ने बिजली की बढ़ती दरों और विभागीय नीतियों के विरोध में प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम मुख्य अभियंता को ज्ञापन सौंपा।

बिजली दरों और विभागीय नीतियों के विरोध में व्यापारियों का प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
HIGHLIGHTS:

• बिजली दरों और विभागीय नीतियों के विरोध में व्यापारियों का प्रदर्शन।

• मुख्यमंत्री के नाम मुख्य अभियंता को सौंपा गया ज्ञापन।

• मीटर शुल्क, ईंधन अधिभार और अघोषित कटौती सहित कई मांगें उठाईं।

जन माध्यम
बरेली।
उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश के जिला अध्यक्ष अकरम खान के नेतृत्व में व्यापारियों ने बिजली विभाग की नीतियों के विरोध में प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री के नाम मुख्य अभियंता को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बिजली की बढ़ती दरों, नए नियमों और उपभोक्ताओं पर बढ़ते आर्थिक बोझ को लेकर हस्तक्षेप की मांग की गई।

अकरम खान ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग की नीतियों के कारण व्यापारियों, उद्योगों और आम उपभोक्ताओं पर लगातार आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। उनका कहना है कि महंगी बिजली के चलते उद्योग और व्यापार प्रभावित हो रहे हैं तथा प्रदेश से अन्य राज्यों की ओर पलायन की स्थिति बन रही है, जिससे भविष्य में राज्य के राजस्व पर भी असर पड़ सकता है।

ज्ञापन में दो किलोवाट तक के बिजली मीटर की कीमत 750 रुपये से बढ़ाकर 5300 रुपये किए जाने के निर्णय को वापस लेने, बिना पूर्व सूचना करीब 47 लाख उपभोक्ताओं का बढ़ाया गया बिजली लोड निरस्त कर पुराने स्तर पर बहाल करने, अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी की वसूली रोकने, बिजली बिलों में लगाए जा रहे 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार को समाप्त करने तथा प्रदेश में अघोषित बिजली कटौती पर रोक लगाकर निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने दावा किया कि यदि विभाग की वर्तमान नीतियों में बदलाव नहीं किया गया तो इसका प्रतिकूल प्रभाव व्यापार और औद्योगिक विकास पर पड़ सकता है। संगठन ने मुख्यमंत्री से जनहित और व्यापार हित को ध्यान में रखते हुए मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की।

ज्ञापन सौंपने के दौरान जावेद आलम, परवेज आलम, राजेश कुमार दिवाकर, प्रवीण गोयल, गौरव गर्ग, डॉ. मुदित प्रताप सिंह सहित अन्य व्यापारी मौजूद रहे।