किसान यूनियन का अल्टीमेटम
भाकियू (चढ़ूनी) ने डीएम बरेली को 8 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा, मांगें पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
➡️ भाकियू (चढ़ूनी) ने प्रशासन को दिया अल्टीमेटम
➡️ डीएम को सौंपा गया 8 सूत्रीय मांग पत्र
➡️ मांगें न मानी गईं तो बड़े आंदोलन की चेतावनी
➡️ किसानों की समस्याओं पर कार्रवाई न होने का आरोप
➡️ बड़ी संख्या में किसान और पदाधिकारी रहे मौजूद
हसीन दानिश/ जन माध्यम
बरेली। किसानों की लंबित समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने एक बार फिर प्रशासन के सामने सख्त रुख अपनाया है। संगठन ने शुक्रवार 9 जनवरी 2026 को जिलाधिकारी बरेली को 8 सूत्रीय मांग पत्र सौंपते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि शीघ्र मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो जिले में जोरदार आंदोलन किया जाएगा।
ज्ञापन सौंपने के बाद भाकियू (चढ़ूनी) के जिलाध्यक्ष केशव सिंह सोलंकी ने कहा कि किसान लंबे समय से आश्वासनों के सहारे जी रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि गरीबी, फसलों की सुरक्षा, उचित मूल्य, सिंचाई व्यवस्था, बिजली और अन्य बुनियादी समस्याओं से किसान लगातार जूझ रहा है। प्रशासन को कार्यालयों तक सीमित न रहकर गांव-गांव जाकर किसानों की पीड़ा समझनी चाहिए।
जिलाध्यक्ष ने दो टूक शब्दों में कहा कि अब केवल आश्वासन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। यदि प्रशासन ने जल्द समस्याओं का समाधान नहीं किया तो संगठन को मजबूरन बड़े स्तर पर संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सभी मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। इनमें जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष इरशाद अंसारी और राधेश्याम, जिला उपाध्यक्ष छेदालाल वर्मा व प्रियांशु पाठक, जिला सचिव अर्जुन यादव, जिला संयोजक रूपलाल, संगठन मंत्री सज्जाद अख्तर जैदी (राजा), महानगर अध्यक्ष मेहमूद हुसैन खान, ग्राम अध्यक्ष (बमियाना) शानू इमरान, ब्लॉक अध्यक्ष (बिथरी) अमन यादव, हर्ष सक्सेना, वीरेंद्र यादव, हरपाल सिंह, छेदालाल, सोहन लाल, महेंद्र सिंह और रवि कुमार शामिल रहे। महिला प्रकोष्ठ से नवाबगंज तहसील अध्यक्ष अनीता देवी, तहसील अध्यक्ष (सदर बरेली) अफसाना अंसारी सहित प्रिया और मन्नू भी मौजूद रहीं।
भारी संख्या में किसानों और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने साफ संकेत दे दिया है कि यदि प्रशासन ने इस बार मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में बरेली में किसान आंदोलन और तेज हो सकता है। किसानों की बढ़ती मायूसी और प्रशासन से टूटती उम्मीदों के बीच अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन क्या कदम उठाता है।