एडीजी की अनोखी पहल, जोन में पुलिस की आंख-कान बनेंगे पेंशनर

एडीजी जोन रमित शर्मा ने पुलिस पेंशनरों के लिए एक अनोखी पहल की शुरुआत की है, जिसमे रिटायर्ड पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई है। सोमवार को आयोजित एक विशेष बैठक में रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों और पेंशनरों से जुड़े अनुभवों और सुझावों को सुनने का अवसर मिला। इस बैठक का उद्देश्य पेंशनरों की समस्याओं को हल करना और उनकी महत्वपूर्ण सलाह को वर्तमान पुलिस तंत्र में शामिल करना था।

एडीजी की अनोखी पहल, जोन में पुलिस की आंख-कान बनेंगे पेंशनर
रमित शर्मा आईपीएस, एडीजी जोन बरेली

बरेली। एडीजी जोन रमित शर्मा ने पुलिस पेंशनरों के लिए एक अनोखी पहल की शुरुआत की है, जिसमे रिटायर्ड पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई है। सोमवार को आयोजित एक विशेष बैठक में रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों और पेंशनरों से जुड़े अनुभवों और सुझावों को सुनने का अवसर मिला। इस बैठक का उद्देश्य पेंशनरों की समस्याओं को हल करना और उनकी महत्वपूर्ण सलाह को वर्तमान पुलिस तंत्र में शामिल करना था। बैठक का आयोजन हाइब्रिड मोड में किया गया, जिसमें बरेली जोन के कार्यालय में पेंशनरों के प्रतिनिधि व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए। जबकि, आठ जिलों के अधिकारी और पेंशनर ऑनलाइन जुड़े। बैठक में सेवानिवृत्त पुलिस पेंशनरों के संघ के अध्यक्ष, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और नोडल अधिकारी भी मौजूद थे। एडीजी ने बैठक में कहा कि पुलिस पेंशनरों को हमेशा सम्मान देना चाहिए और उनके अनुभवों से लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर माह पहले सप्ताह में पुलिस पेंशनर कल्याण संस्थान के पदाधिकारी थानों पर बैठक सुनिश्चित करें। पेंशनरों की सूची अपडेट की जाए और हर तीन महीने में हल्का दरोगा और बीट कांस्टेबल पेंशनरों के परिवारों से मिलकर उनकी समस्याओं की जानकारी लें।

यह हैं मुख्य पहलें:

  • त्रैमासिक बैठकें: रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों के साथ नियमित त्रैमासिक बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
  • मेडिकल और वित्तीय मुद्दे: लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति और अन्य वित्तीय समस्याओं के शीघ्र समाधान की दिशा में काम किया जाएगा।
  • साक्ष्य दर्ज करने के नए तरीके: पेंशनरों के साक्ष्य को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दर्ज करने का प्रस्ताव।
  • अपराध नियंत्रण और प्रशिक्षण: रिटायर्ड अधिकारियों के अनुभवों को अपराध नियंत्रण और पुलिस प्रशिक्षण में शामिल किया जाएगा।
  • पेंशनरों के सम्मान में पहल: एडीजी ने पेंशनरों के परिवारों के प्रति पुलिस की जिम्मेदारी को और भी सशक्त किया है। पेंशनरों को "बुजुर्गों" की तरह सम्मान देने की पहल से उनकी समस्याओं का समाधान जल्दी होगा और उन्हें पूरी तरह से सम्मान दिया जाएगा।

स्मृति चिह्नों का वितरण:

बैठक के अंत में एडीजी रमित शर्मा ने सभी प्रतिभागियों को स्मृति चिह्न भेंट किए और उनके योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया। बैठक ने रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों और सक्रिय पुलिस बल के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा दिया, जिससे पुलिस तंत्र में एक नई सकारात्मक दिशा मिली।