सुख़निस्तान फाउंडेशन का मुशायरा 'रंगे सुख़न' शायरी से महका बरेली का अदबी माहौल
सुख़निस्तान फाउंडेशन के ‘रंगे सुख़न’ मुशायरे ने बरेली में उर्दू शायरी के दीवानों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मशहूर शायरों की ग़ज़लों से पूरा माहौल अदबी रंग में डूबा रहा।
➡️ सुख़निस्तान फाउंडेशन ने कराया भव्य मुशायरा
➡️ ‘रंगे सुख़न’ ने शायरी से महकाया माहौल
➡️ ख़ुशलोक ऑडिटोरियम में उमड़ी श्रोताओं की भीड़
➡️ अज़हान वारसी ने किया संचालन, नदीम शम्सी रहे अध्यक्ष
हसीन दानिश / जनमाध्यम
बरेली। उर्दू अदब और शायरी के दीवानों के लिए एक यादगार शाम का आयोजन सुख़निस्तान फाउंडेशन ने किया। शहर के ख़ुशलोक ऑडिटोरियम में 'रंगे सुख़न' शीर्षक से आयोजित इस भव्य मुशायरे ने श्रोताओं को शायरी के रंगों में सराबोर कर दिया।
मुशायरे में शायरी से गहरी दिलचस्पी रखने वाले बड़ी संख्या में मौजूद रहे और पूरा माहौल अदबी रंग में रंगा रहा। कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध शायर अज़हान वारसी ने बखूबी किया, जबकि अध्यक्षता वरिष्ठ शायर नदीम शम्सी ने की।
अपने संक्षिप्त संबोधन में नदीम शम्सी ने कहा, "ऐसे मुशायरे सिर्फ शायरी नहीं सुनाते, बल्कि हमारी भाषा, संवेदनाओं और आपसी समझ को और मजबूत बनाते हैं।"
मुशायरे में शामिल प्रमुख शायरों में रिज़वान फ़रीदी,फ़हीम दानिश,डॉक्टर ब्रिज भूषण, सलमान आरिफ़ बरेली, मुशारिफ़ हुसैन,साजिद सफ़दर, सुल्तान जहाँ,सय्यद फ़रहान और शकील सेथली शामिल रहे। इन शायरों ने अपनी ग़ज़लों और नज़्मों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और हर तरफ़ दाद की बौछार हुई।
इस अवसर पर सुख़निस्तान फाउंडेशन के संस्थापक मोहसिन ख़ान भी मौजूद रहे। उन्होंने अपने संदेश में कहा, "हमारा मकसद शायरी और अदब को आम लोगों तक पहुंचाना है ताकि नई पीढ़ी इस खूबसूरत परंपरा से जुड़ सके और इसे आगे बढ़ा सके।"
कार्यक्रम में विशेष अतिथियों डॉ अनीस बेग़,सय्यद हैदर,वसीम अख़्तर, हूरिया रेहमान,राफ़िया शबनम और लवी प्रभु ने भी हिस्सा लिया। सभी ने अपने पैग़ाम में ऐसे अदबी आयोजनों को शहर की सांस्कृतिक धरोहर को जिंदा रखने के लिए बेहद ज़रूरी बताया।
यह मुशायरा बरेली में उर्दू शायरी के प्रति बढ़ती रुचि और युवाओं के जुड़ाव का एक बेहतरीन उदाहरण साबित हुआ। सुख़निस्तान फाउंडेशन की यह पहल शहर में अदबी महफिलों को नया आयाम देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।