बरेली में नदी किनारे मगरमच्छ दिखा
बरेली के शाही क्षेत्र में बहगुल नदी किनारे मगरमच्छ दिखने से दहशत, किसानों और बच्चों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता।
नदी किनारे मगरमच्छ दिखने से दहशत
गेहूं कटाई के बीच किसानों की बढ़ी चिंता
बच्चों की सुरक्षा को लेकर भय
वन विभाग ने टीम भेजी, सतर्क रहने की सलाह
दीनानाथ कश्यप। जन माध्यम
बरेली। शाही। खेतों की रखवाली करने निकले किसानों के कदम उस वक्त थम गए, जब उन्होंने नदी किनारे एक खामोश खतरा देखा मगरमच्छ। पल भर में मेहनत और जिंदगी दोनों पर खतरे का एहसास छा गया।
शाही क्षेत्र के गांव डूंगरपुर की धौंड़ा नदी के बाद अब छोटा बसावनपुर के पास बहगुल नदी किनारे रविवार सुबह मगरमच्छ दिखाई देने से इलाके में दहशत फैल गई। टावर के पास खेतों की ओर जा रहे किसानों ने जैसे ही नदी किनारे इस विशाल जीव को देखा, वे घबराकर तुरंत सुरक्षित दूरी पर चले गए।
इस समय गेहूं की कटाई का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन अधिकांश फसल नदी पार है। किसान सुबह-सुबह नदी पार कर अपने खेतों में पहुंचते हैं। ऐसे में मगरमच्छ का दिखाई देना उनके लिए बड़ी चिंता का कारण बन गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चे भी अक्सर नदी किनारे खेलते हुए पहुंच जाते हैं, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर खतरा और बढ़ गया है। किसानों के मुताबिक उन्होंने बड़ी मेहनत से फसल तैयार की है, लेकिन अब डर के कारण उसकी देखभाल करना मुश्किल हो रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि मगरमच्छ को जल्द पकड़कर सुरक्षित स्थान पर भेजा जाए, ताकि कोई बड़ा हादसा न हो। साथ ही लोगों को चेतावनी दी गई है कि बच्चे और किसान अकेले नदी किनारे न जाएं।
वन रेंजर मीरगंज संतोष कुमार मठपाल ने बताया कि मगरमच्छ होने की सूचना पर टीम को मौके पर भेजा गया, लेकिन निरीक्षण के दौरान वह दिखाई नहीं दिया। हालांकि उन्होंने ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
यह घटना एक बड़ा सवाल छोड़ जाती है क्या ग्रामीण इलाकों में ऐसे खतरों से निपटने के लिए पर्याप्त तैयारी है, या फिर हर बार खतरा सामने आने के बाद ही कदम उठाए जाएंगे?