एक क्लिक, और उड़ गए 70 हज़ार
मीरगंज में फोनपे यूपीआई फ्रॉड के जरिए महिला के खाते से 70 हजार रुपये की ठगी, साइबर पोर्टल पर शिकायत के बाद पुलिस ने दर्ज किया केस।
➡️ फोनपे यूपीआई से महिला के खाते से उड़ाए गए 70 हजार
➡️ ठगी का मैसेज आते ही पीड़िता ने की शिकायत
➡️ साइबर क्राइम पोर्टल और बैंक को तुरंत दी सूचना
➡️ मीरगंज पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ दर्ज किया मुकदमा
➡️ साइबर सेल से रकम रिकवरी और सख्त कार्रवाई की मांग
डेस्क/ जन माध्यम
मीरगंज (बरेली)। डिजिटल युग ने जहां सुविधाएं बढ़ाई हैं, वहीं साइबर ठगों को भी नए रास्ते दे दिए हैं। थाना मीरगंज क्षेत्र के नौगावा गांव से सामने आया यूपीआई ठगी का मामला इसी सच्चाई की कड़वी मिसाल बन गया है। यहां फोनपे (PhonePe) यूपीआई ऐप के जरिए एक महिला के बैंक खाते से 70 हजार रुपये की ठगी कर ली गई।
पीड़िता मधु पुत्री राकेश गिरी, निवासी मीर नगर उर्फ़ नौगावा, ने बताया कि 20 अगस्त 2025 को दोपहर के समय उनके साथ यह साइबर फ्रॉड हुआ। उनके अनुसार, एसबीआई बैंक खाते से फोनपे यूपीआई के माध्यम से अज्ञात व्यक्ति ने धोखाधड़ी कर पूरी रकम निकाल ली। जब खाते से पैसे कटने का मैसेज आया, तब उन्हें ठगी का अहसास हुआ।
घबराने के बजाय पीड़िता ने तुरंत सतर्कता दिखाई। उन्होंने साइबर क्राइम पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई और साथ ही संबंधित बैंक को सूचना दी, ताकि समय रहते फ्रॉड अमाउंट को होल्ड कर रिकवरी की प्रक्रिया शुरू की जा सके।
मधु ने प्रशासन और साइबर सेल से मांग की है कि
यूपीआई ठगी की निष्पक्ष जांच कराई जाए,
फ्रॉड की गई पूरी 70,000 रुपये की राशि जल्द से जल्द रिकवर कराई जाए,
और इस घटना को अंजाम देने वाले दोषी व्यक्ति या गिरोह के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
इस घटना के बाद इलाके में डिजिटल लेनदेन को लेकर चिंता का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि साइबर ठग रोज़ नए-नए तरीके अपनाकर आम लोगों को निशाना बना रहे हैं। एक छोटी सी चूक भारी नुकसान में बदल रही है।
साइबर विशेषज्ञों की अपील
साइबर विशेषज्ञों ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे
अनजान कॉल, लिंक या क्यूआर कोड से दूर रहें,
ओटीपी, पिन या पासवर्ड किसी से साझा न करें,
और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत बैंक, साइबर हेल्पलाइन 1930 या पोर्टल पर दर्ज कराएं।
फिलहाल पीड़िता को न्याय और रकम वापसी की उम्मीद है।
वहीं मीरगंज पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
यह मामला एक बार फिर चेतावनी है—
डिजिटल सुविधा के साथ डिजिटल सावधानी भी उतनी ही ज़रूरी है।