वेदव्यास जयंती पर संगोष्ठी, सात विप्रों का हुआ सम्मान
मथुरा में सर्वोदयी ब्राह्मण विकास संस्थान की ओर से महर्षि वेदव्यास प्रादुर्भाव महोत्सव पर संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में सात विप्रों को सम्मानित किया गया और वेदव्यास के योगदान पर वक्ताओं ने विचार रखे।
महर्षि वेदव्यास प्रादुर्भाव महोत्सव पर संगोष्ठी का आयोजन।
सात विप्रों को माला, पटका, दुशाला और स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
वक्ताओं ने वेदव्यास के जीवन, महाभारत और वेदों के संरक्षण में उनके योगदान पर प्रकाश डाला।
जन माध्यम
मथुरा। सर्वोदयी ब्राह्मण विकास संस्थान के तत्वावधान में महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास के प्रादुर्भाव महोत्सव के अवसर पर रविवार को एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता घनश्याम हरियाणा ने की। इस अवसर पर सात विप्रों को माला, पटका, दुशाला और महर्षि वेदव्यास की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पंडित कामेश्वर नाथ चतुर्वेदी, संस्थान अध्यक्ष पंडित सोहनलाल शर्मा, नारायण प्रसाद शर्मा, मुकट मणि शर्मा, संजय हरियाणा, सुरेंद्र खोना, कृष्ण कुमार भारद्वाज और कार्यक्रम संयोजक लीलाधर शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महर्षि वेदव्यास के चित्र पर माल्यार्पण एवं पूजन कर किया।
मुख्य अतिथि पंडित कामेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने कहा कि आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को महर्षि वेदव्यास का प्रादुर्भाव दिवस मनाया जाता है, जिसे गुरु पूर्णिमा अथवा व्यास पूर्णिमा के रूप में भी जाना जाता है। श्री जगद्गुरु श्री विष्णु प्रपन्नाचार्य महाराज ने महर्षि वेदव्यास के जीवन और उनके आध्यात्मिक योगदान पर प्रकाश डाला। वहीं विनोद शर्मा ने उन्हें ज्योतिष शास्त्र का प्रवर्तक बताया।
संस्थान अध्यक्ष पंडित सोहनलाल शर्मा ने कहा कि महर्षि वेदव्यास ने महाभारत सहित अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना कर भारतीय संस्कृति को अमूल्य धरोहर प्रदान की। प्रेमचंद दीक्षित राजगुरु और गोपाल प्रसाद शर्मा ने भी वेदव्यास द्वारा वेदों के संकलन, 18 पुराणों की रचना तथा गुरु परंपरा में उनके योगदान का उल्लेख किया।
कार्यक्रम में डॉ. जमुना शर्मा, अनन्या पचौरी, रोहित गौड़, पंकज शर्मा, भगवान साहू, दिवाकर आचार्य, रामगोपाल शर्मा, दिलीप पांडे, महेंद्र दत्त आचार्य सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।