असली माफिया कौन?... लेखपाल, भूमाफिया, ट्रांसपोर्टर या कोई और..
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कई लायजनर पर भी लगीं खुफिया निगाहें
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कुछ मीडिया वाले भी जांच के रडार पर
बरेली। एक लेखपाल ने गैंग बनाया, रसूखदारों को जोड़ा, एक ट्रांसपोर्टर से फाइनेंस जुटाया और लग गए जमीनों को कब्जाने में। इस पूरे गोरखधंधे में करोड़ों करोड़ रुपये छाप लिए। जब इंताह हो गई तब पकड़े गए। अब सुनियोजित साजिशों की परतें दर परतें खुल रही हैं। शासन सत्ता के सूत्र बता रहे हैं कि इस पूरे मामले की धमक लखनऊ तक है। फरमान है कि लेखपाल, भूमाफिया और परदे के पीछे से खेल रच रहे एक ट्रांसपोर्टर की भूमिका को तार तार कर दिया जाये, यानी पूरी बारीकी से समझ लिया जाये। खबरें यह भी आ रही हैं कि जांच की आंच कुछ लाइजनरों पर भी है और कुछ मीडिया वालों पर भी। उम्मीद है कि खुलासे दर खुलासों के बीच ही जल्द ही कुछ और भी बड़े खुलासे हो जायेंगे। जल्द ही एसआईटी का गठन भी किया जा रहा है।
सरकारी जमीनों और किसानों की संपत्तियों पर कब्जा करने के लिए लेखपाल, भूमाफियाओं और रसूखदार ट्रांसपोर्टरों के गठजोड़ का पर्दाफाश हुआ है। यह गठजोड़ न केवल सुनियोजित साजिशों के माध्यम से अपनी गतिविधियों को अंजाम देता रहा है, बल्कि प्रशासन की नाकामी और भ्रष्टाचार के चलते अब पूरी तरह बेखौफ हो गया है। इस गिरोह की गतिविधियां कानून और न्याय प्रणाली को चुनौती देने वाली हैं, जिससे आम जनता और किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
गठजोड़ का खुलासा
सूत्रों के मुताबिक, निलंबित चकबंदी लेखपाल सावन कुमार जायसवाल इस नेटवर्क का अहम हिस्सा था। यह गिरोह जमीन हड़पने के लिए एक बड़े ट्रांसपोर्टर से आर्थिक सहयोग प्राप्त करता था। जानकारी के अनुसार, नवाबगंज निवासी रेनू की मदद से विवादित जमीनों के पांच बैनामे करवाए गए। इन बैनामों में ऊंचे सर्किल रेट पर लाखों रुपये के स्टांप शुल्क अदा किए गए, जिससे इस साजिश का दायरा और भी व्यापक नजर आता है।
रेनू, जो इस गिरोह की मुख्य कड़ी मानी जा रही है, ने विवादित जमीनों पर कब्जा करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस अब बैनामों में शामिल सभी नामों की जांच कर रही है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि रेनू की भूमिका संदिग्ध है और उसकी जांच की जा रही है।
जांच की खबरें
इस पूरे प्रकरण में तीन गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, कई मुल्जिम बनाये जा चुके हैं। पता चला है वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्या जल्द ही इसमें स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम एसआईटी का गठन कर सकते हैं। लखनऊ से आ रही खबरें बता रही हैं कि परदे के पीछे से खेलने वाले भी बेनकाब किए जाने हैं, इसमें कुछ लाइजनर व मीडिया से जुड़े लोग भी शामिल हो सकते हैं।
लेखपाल के सहयोगी गिरफ्तार
इस मामले में लेखपाल सावन कुमार का करीबी सहयोगी दीपक कुमार भी गिरफ्तार किया गया है। बारादरी पुलिस ने दीपक को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नूरजहां की जमीन का बैनामा करवाने के आरोप में जेल भेजा। दीपक ने दावा किया था कि जमीन उसके पूर्वजों की है, जबकि यह दावा पूरी तरह फर्जी निकला।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि दीपक कुमार ने इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए दस्तावेजों में कई तरह की गड़बड़ियां कीं। उसने स्थानीय अधिकारियों को गुमराह कर जमीन का स्वामित्व अपने पक्ष में करवाया। फिलहाल, पुलिस अन्य मामलों में भी उसकी संलिप्तता की जांच कर रही
कैसे काम करता है यह गिरोह
इस गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद संगठित और योजनाबद्ध है। सबसे पहले यह लोग ऐसे जमीनों की पहचान करते हैं जो विवादित या बिना देखरेख में हों। इसके बाद, फर्जी दस्तावेज तैयार करके जमीन का बैनामा करवाया जाता है। इसमें लेखपाल की भूमिका अहम होती है, क्योंकि वह जमीन की माप-जोख और स्वामित्व की पुष्टि में सहायता करता है।
गिरोह के सदस्य सर्किल रेट का उपयोग करके बैनामे को वैध दिखाने की कोशिश करते हैं। इसके बाद, जबरन कब्जा कर लिया जाता है और पीड़ितों को धमकाकर चुप रहने पर मजबूर किया जाता है। इस प्रक्रिया में भूमाफियाओं को ट्रांसपोर्टरों का भी साथ मिलता है, जो आर्थिक रूप से इस पूरे नेटवर्क को मजबूत करते हैं।
प्रशासन की नाकामी पर सवाल
इस गठजोड़ के सामने आने के बाद प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कैसे एक निलंबित लेखपाल इतने लंबे समय तक सक्रिय रहकर जमीनों का फर्जीवाड़ा कर सकता है? क्या प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत के बिना यह संभव है?
सूत्रों का कहना है कि स्थानीय प्रशासन को इस गिरोह की गतिविधियों की जानकारी थी, लेकिन कार्रवाई करने में जानबूझकर देरी की गई। अब जब मामले का खुलासा हुआ है, तो जिम्मेदार अधिकारी केवल जांच का आश्वासन देकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
किसानों और आम जनता पर प्रभाव
इस गठजोड़ की वजह से सबसे ज्यादा नुकसान किसानों और आम जनता को उठाना पड़ रहा है। जिन लोगों की जमीनें हड़पी गई हैं, वे न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं। फर्जी दस्तावेजों के जरिए उनकी संपत्तियों पर कब्जा कर लिया गया है, और उन्हें अपनी जमीन वापस पाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ रही है।
जाने क्या बोले का एसएसपी
इस मामले पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने कहा, "हमने गिरोह के कई सदस्यों की पहचान कर ली है। दीपक कुमार और अन्य संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। रेनू और अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जल्द ही इस मामले में और गिरफ्तारियां होंगी।"
चकबंदी विभाग के उच्च अधिकारी ने भी इस बात को स्वीकार किया कि विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से यह फर्जीवाड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि निलंबित लेखपाल सावन कुमार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और उसके सभी मामलों की जांच कराई जाएगी।
इस गिरोह के लेखपाल के खिलाफ कैंट थाने में भी कई मुकदमें दर्ज हैं, मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द ही एसआईटी का गठन किया जा रहा है। किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।
अनुराग आर्य, एसएसपी बरेली