भैंस,भारत की ब्लैक गोल्ड

आईवीआरआई बरेली में राष्ट्रीय भैंस विकास सम्मेलन, भैंस को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए वैज्ञानिक संरक्षण और जेनेटिक सुधार पर मंथन।

भैंस,भारत की ब्लैक गोल्ड
HIGHLIGHTS:

➡️ आईवीआरआई इज्जतनगर में राष्ट्रीय भैंस विकास सम्मेलन
➡️ भैंस को बताया गया भारत की “ब्लैक गोल्ड”
➡️ संरक्षण, वैज्ञानिक पोषण और जेनेटिक सुधार पर जोर
➡️ भैंस से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पोषण सुरक्षा मजबूत
➡️ सम्मेलन की सिफारिशें नीति पुस्तिका के रूप में प्रकाशित

राष्ट्रीय भैंस विकास सम्मेलन में संरक्षण, पोषण और जेनेटिक सुधार पर जोर

डेस्क/ जन माध्यम 
बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान आईसीएआर, आईवीआरआई, इज्जतनगर में आयोजित राष्ट्रीय भैंस विकास सम्मेलन का समापन वैज्ञानिक चिंतन, नीतिगत सुझावों और भविष्य की स्पष्ट दिशा के साथ सम्पन्न हुआ। समापन सत्र के मुख्य अतिथि डॉ. अमरेश कुमार, महानिदेशक, केसीएमटी ने भैंस को भारत की ब्लैक गोल्ड बताते हुए इसके संरक्षण, वैज्ञानिक विकास और योजनाबद्ध उपयोग पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. अमरेश कुमार ने कहा कि भैंस केवल दुग्ध उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पोषण सुरक्षा और आजीविका का मजबूत आधार रही है। उन्होंने कहा कि हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में भैंस को परंपरागत रूप से संपत्ति माना जाता था। वर्तमान समय में भैंस मांस के निर्यात से देश को अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा प्राप्त हो रही है, बावजूद इसके नर भैंसों के वैज्ञानिक पालन और मांस उत्पादन की दिशा में अभी भी सुनियोजित प्रयासों की कमी है। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक पोषण से न केवल मांस की गुणवत्ता और प्रोटीन कंटेंट बेहतर होता है, बल्कि फैट कंटेंट भी कम किया जा सकता है। जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में उन्होंने कहा कि पोषण विज्ञान के माध्यम से पशुओं से निकलने वाली मीथेन गैस को नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी। आनुवंशिक सुधार पर बोलते हुए उन्होंने ब्रीडर सोसायटी के गठन की आवश्यकता बताते हुए कहा कि उच्च दुग्ध उत्पादन वाली नस्लों के आधार पर ही सुधार कार्य होना चाहिए। कार्यवाहक निदेशक डॉ. एस. के. सिंह ने कहा कि यह सम्मेलन वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और निजी क्षेत्र के बीच संवाद का प्रभावी मंच बना है। वहीं, डॉ. इंद्रजीत सिंह, अध्यक्ष, इंडियन सोसाइटी फॉर बफेलो डेवलपमेंट ने बताया कि भारत के पास विश्व की 56 प्रतिशत भैंस आबादी है और वैश्विक दुग्ध उत्पादन में देश की भूमिका निर्णायक है। सम्मेलन में प्रस्तुत शोध और सिफारिशों को नीति सुझाव पुस्तिका के रूप में प्रकाशित किया जाएगा। आयोजन सचिव डॉ. ज्ञानेन्द्र सिंह ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मेलन भैंस विकास के क्षेत्र में एक मील का पत्थर सिद्ध होगा।