बहेड़ी संपूर्ण समाधान दिवस: 132 शिकायतों में से मौके पर सुलझीं सिर्फ 18, अस्पताल और गन्ना भुगतान पर हंगामा

बहेड़ी तहसील सभागार में एडीएम न्यायिक देश दीपक की अध्यक्षता में संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन। अस्पताल में डॉक्टरों की कमी, बंद लैब और चीनी मिल द्वारा गन्ना भुगतान न होने पर फूटा जनता का गुस्सा।

बहेड़ी संपूर्ण समाधान दिवस: 132 शिकायतों में से मौके पर सुलझीं सिर्फ 18, अस्पताल और गन्ना भुगतान पर हंगामा
HIGHLIGHTS:

फरियादियों की भारी भीड़: शनिवार को तहसील सभागार में कुल 132 मामले आए सामने, 114 शिकायतें जांच के लिए लंबित।

स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल: सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की किल्लत, बंद पड़ी लैब और अल्ट्रासाउंड न होने से मरीजों में भारी आक्रोश।

किसानों का दर्द: केसर चीनी मिल द्वारा लंबे समय से बकाया गन्ना भुगतान न किए जाने पर अन्नदाताओं ने जताई कड़ी नाराजगी।

बहेड़ी। आम जनता की प्रशासनिक और बुनियादी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे दावों की जमीनी हकीकत शनिवार को बहेड़ी तहसील में साफ नजर आई। तहसील सभागार में आयोजित 'सम्पूर्ण समाधान दिवस' में अपनी फरियाद लेकर दूर-दराज के गांवों से सैकड़ों ग्रामीण पहुंचे। इस दौरान कुल 132 गंभीर शिकायतें पंजीकृत की गईं, जिनमें से महज 18 मामलों का ही मौके पर अंतिम निस्तारण हो सका। बाकी बची 114 फाइलों को अधिकारियों ने संबंधित विभागों को फॉरवर्ड करते हुए जल्द रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए।

एडीएम और तहसीलदार के सामने शिकायतों का अंबार

इस बार समाधान दिवस की कमान एडीएम (न्यायिक) देश दीपक और तहसीलदार भानू प्रताप के हाथों में थी। दोनों अधिकारियों ने एक-एक कर जनता के दुख-दर्द को सुना। अधिकारियों ने कड़े लहजे में कहा कि मुख्यमंत्री के साफ निर्देश हैं कि जनसमस्याओं के निस्तारण में कोई भी हीलाहवाली या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध कार्रवाई न करने वाले पटवारी, सचिव और विभागीय बाबुओं पर सीधी गाज गिरेगी।

बीमार व्यवस्था: सरकारी अस्पताल की बदहाली पर फूटा गुस्सा

समाधान दिवस में सबसे प्रमुखता से स्थानीय सरकारी अस्पताल की बदहाल चिकित्सा व्यवस्था का मुद्दा छाया रहा। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लिखित शिकायत सौंपते हुए आरोप लगाया कि अस्पताल खुद 'बीमार' चल रहा है। यहां डॉक्टरों की भारी कमी है और जो गिने-चुने चिकित्सक तैनात भी हैं, वे अपने केबिन से नदारद रहते हैं।

इसके अलावा अस्पताल की पैथोलॉजी लैब लंबे समय से ताले में बंद है। एक्स-रे मशीनें बाबा आदम के जमाने की हो चुकी हैं और पूरे अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की कोई व्यवस्था नहीं है। इस बदहाली के कारण गरीब मरीजों को मजबूरन निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों और प्राइवेट डॉक्टरों की जेबें भरनी पड़ रही हैं।

केसर चीनी मिल पर भड़के अन्नदाता

तहसील दिवस में किसानों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी पहुंचा, जिसने केसर चीनी मिल द्वारा किए जा रहे आर्थिक शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद की। किसानों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि मिल प्रबंधन लंबे समय से उनके गन्ने का बकाया भुगतान दबाकर बैठा है। नया सीजन आने को है लेकिन पुराना पैसा न मिलने से किसानों के सामने बच्चों की पढ़ाई, शादियों और अगली फसल की बुवाई का संकट खड़ा हो गया है। किसानों ने प्रशासन से मांग की कि मिल के खिलाफ कड़े कदम उठाकर उनका शीघ्र भुगतान सुनिश्चित कराया जाए।

तस्वीर में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि अधिकारियों के सामने अपनी समस्याओं की अर्जी लगाने के लिए किस तरह लोगों की कतारें लगी हुई हैं।

राशन कार्ड और बिजली-पानी की भी समस्याएं आई सामने

इन दो बड़े मुद्दों के अलावा ग्रामीण अंचलों में नए राशन कार्ड न बनने, कोटेदारों की मनमानी, अवैध कब्जों से जुड़े राजस्व विवाद, बिजली की अघोषित कटौती और पेयजल आपूर्ति ठप होने से जुड़ी दर्जनों शिकायतें भी दर्ज की गईं। एडीएम न्यायिक देश दीपक ने इन सभी मामलों का संज्ञान लेते हुए संबंधित ब्लॉक और बिजली घर के अधिकारियों को निष्पक्ष जांच कर पीड़ित पक्षों को न्याय दिलाने का हुक्म जारी किया है।