हादसे के बाद 30 मिनट तक तड़पता रहा तीन बहनों का इकलौता भाई

बरेली में हाईवे हादसे के बाद घायल युवक 30 मिनट तक तड़पता रहा, पुलिस देरी से पहुंची और अस्पताल पहुचते ही उसकी मौत हो गई।

हादसे के बाद 30 मिनट तक तड़पता रहा तीन बहनों का इकलौता भाई
HIGHLIGHTS:

लापरवाही ने छीना एक और परिवार का सहारा

अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने किया मृत घोषित

परिवार का इकलौता सहारा छिन गया

जन माध्यम
बरेली।
सड़क पर तड़पती एक जिंदगी मदद के लिए पुकारती रही, लेकिन व्यवस्था की सुस्ती ने उसकी हर सांस छीन ली और इंसानियत एक बार फिर सवालों के कटघरे में खड़ी नजर आई।

सीबीगंज क्षेत्र में बरेली दिल्ली हाईवे पर हुए दर्दनाक हादसे ने पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बंडिया गांव निवासी 25 वर्षीय सनी कश्यप को एक तेज रफ्तार वाहन ने जोरदार टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़ा।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि हादसे की जगह परसाखेड़ा पुलिस चौकी से महज कुछ कदम की दूरी पर थी, इसके बावजूद घायल युवक करीब आधा घंटा सड़क पर तड़पता रहा। इस दौरान न तो समय पर पुलिस पहुंची और न ही उसे तत्काल चिकित्सा सहायता मिल सकी।

जब तक पुलिस मौके पर पहुंची और सनी को जिला अस्पताल भिजवाया गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यह देरी एक जिंदगी पर भारी पड़ गई।

सनी कश्यप परसाखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र की एक प्लाईवुड फैक्टरी में मजदूरी करता था। सोमवार दोपहर वह खाना खाने जा रहा था, तभी रोड नंबर तीन के पास यह हादसा हुआ। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वह मौके पर ही गंभीर रूप से घायल हो गया।

सनी अपने परिवार का इकलौता सहारा था। उसकी शादी दो साल पहले हुई थी और उसके पीछे पत्नी पिंकी, डेढ़ साल का बेटा कृष्णा, मां और तीन बहनें हैं। उसकी मौत ने पूरे परिवार को बेसहारा कर दिया है। घर में कोहराम मचा हुआ है और हर आंख नम है।

यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का आईना है। जब पुलिस चौकी चंद कदम दूर हो और फिर भी मदद आधे घंटे बाद पहुंचे, तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर जिम्मेदारी किसकी है।

पुलिस का कहना है कि अज्ञात वाहन की तलाश की जा रही है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर समय पर मदद मिल जाती, तो क्या सनी की जान बच सकती थी।

अब जरूरत सिर्फ जांच की नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने की है, ताकि भविष्य में कोई और जिंदगी इस तरह सड़क पर तड़पते हुए दम न तोड़े।