मथुरा में मनाई गई बाबू जगजीवन राम की जयंती

मथुरा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बाबू जगजीवन राम की 118वीं जयंती पर श्रद्धांजलि दी, उनके योगदान को याद किया गया।

मथुरा में मनाई गई बाबू जगजीवन राम की जयंती
HIGHLIGHTS:

कांग्रेस ने मनाई 118वीं जयंती

कार्यालय पर पुष्पांजलि कार्यक्रम आयोजित

दलितों के अधिकारों पर उनके योगदान को याद किया

नेताओं ने उनके संघर्षपूर्ण जीवन पर डाला प्रकाश

श्याम बिहारी भार्गव । जन माध्यम

मथुरा। जब इतिहास के महान नेताओं को याद किया जाता है, तो वह सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं होती वह उनके संघर्ष और विचारों को दोहराने का अवसर भी बन जाती है।

पूर्व उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की 118वीं जयंती के अवसर पर मथुरा में जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा सेठ बाड़ा स्थित कार्यालय पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत उनके चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश धनगर ने कहा कि बाबू जगजीवन राम का जीवन राजनीतिक और सामाजिक संघर्षों से भरा रहा। उन्होंने सदियों से शोषित और उत्पीड़ित दलितों तथा मजदूरों के अधिकारों के लिए ऐतिहासिक कार्य किए और कभी भी अन्याय के आगे झुके नहीं।

जिला कांग्रेस महामंत्री वैद्य मनोज गौड़ ने उनके स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को याद करते हुए बताया कि उन्होंने सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया, जिसके चलते उन्हें जेल भी जाना पड़ा। उन्होंने अखिल भारतीय दलित वर्ग की स्थापना की और बिहार विधानसभा परिषद के सदस्य बने।

उन्होंने यह भी बताया कि स्वतंत्र भारत के पहले श्रम मंत्री के रूप में बाबू जगजीवन राम ने न्यूनतम मजदूरी कानून लागू कराया। 1971 के भारत-पाक युद्ध के समय रक्षा मंत्री के रूप में देश का नेतृत्व किया और कृषि मंत्री रहते हुए हरित क्रांति के माध्यम से भारत को खाद्य आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर किया।

कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने उन्हें दलितों के अधिकारों का सबसे बड़ा प्रहरी बताते हुए उनके योगदान को याद किया।

इस अवसर पर बलवीर सिंह प्रधान, करन निषाद, महेश चौबे, मोनू निषाद, मोहम्मद दिलशाद, मनीष चौधरी, सुरेश चंद्र, राकेश शर्मा, राजेश धनगर, विवेक, सुरेश शर्मा, रवि खरे, बलवीर धनगर सहित कई लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया क्या आज के दौर में भी उनके दिखाए रास्ते पर चलकर समाज में समानता और न्याय स्थापित किया जा रहा है, या उनके विचार सिर्फ समारोहों तक ही सीमित रह गए हैं?