पड़ोसी पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का आरोप, महिला अधिवक्ता ने मांगी सुरक्षा
बरेली के किला थाना क्षेत्र में एक महिला अधिवक्ता ने पड़ोसी पर शराब के नशे में गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए पुलिस अधिकारियों से कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की है।
• महिला अधिवक्ता ने पड़ोसी पर शराब के नशे में गाली-गलौज और धमकी देने का आरोप लगाया।
• पूर्व में कई शिकायतें करने के बावजूद कार्रवाई न होने का दावा।
• पुलिस अधिकारियों से आरोपी के विरुद्ध कार्रवाई और परिवार की सुरक्षा की मांग।
जन माध्यम
बरेली। किला थाना क्षेत्र के जकाती मोहल्ला निवासी एक महिला अधिवक्ता ने अपने पड़ोसी पर शराब के नशे में आए दिन गाली-गलौज करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। पीड़िता ने पुलिस अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर मामले की जांच कर कार्रवाई और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
पीड़िता का आरोप है कि उसका पड़ोसी अक्सर शराब के नशे में उसके घर के बाहर आकर अभद्र भाषा का प्रयोग करता है और जान से मारने की धमकी देता है। उनका कहना है कि इस संबंध में पहले भी थाना किला में कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने अपनी पूर्व शिकायतों की प्रतियां भी प्रार्थना पत्र के साथ संलग्न की हैं।
महिला अधिवक्ता का यह भी आरोप है कि उन्होंने कई बार आरोपी के परिजनों से भी उसे समझाने का प्रयास किया, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी की मां होमगार्ड विभाग में कार्यरत हैं, जिसके कारण उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है।
पीड़िता ने बताया कि वह अपने छह वर्ष की बेटी और आठ माह के बेटे के साथ घर में रहती हैं। उनके पति निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं और अधिकांश समय घर से बाहर रहते हैं। ऐसे में आरोपी की कथित धमकियों के कारण पूरा परिवार भय के माहौल में जीवन व्यतीत कर रहा है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि महिला हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने के बावजूद 24 घंटे बीत जाने के बाद भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। पीड़िता ने आशंका जताई है कि आरोपी भविष्य में किसी अप्रिय घटना को अंजाम दे सकता है।
फिलहाल, पुलिस अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपों के संबंध में विधिक कार्रवाई करने और पीड़ित परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है। मामले में पुलिस का पक्ष समाचार लिखे जाने तक सामने नहीं आया था।