हर मोबाइल के साथ लौटी मुस्कान
पुलिस की साइबर टीमों का कमाल, एक माह में 95 लाख के मोबाइल बरामद
बरेली पुलिस ने मई माह के विशेष अभियान में 95 लाख रुपये मूल्य के 462 गुमशुदा मोबाइल फोन किए बरामद।
एसएसपी अनुराग आर्य के तकनीक आधारित निर्देशन और सीईआईआर (CEIR) पोर्टल की मदद से सर्विलांस टीम को मिली बड़ी सफलता।
एसपी साउथ अंशिका वर्मा के जमीनी समन्वय और थानों की साइबर टीमों की संवेदनशीलता से जनवरी 2025 से अब तक 10.5 करोड़ के 5,259 मोबाइल लौटे।
जन माध्यम
बरेली। कभी मोबाइल का गुम हो जाना लोगों के लिए एक ऐसी मायूसी बन जाता है, जैसे किसी अपने का बिछड़ जाना। यादें, संपर्क, दस्तावेज़ और जीवन की कई अहम कड़ियाँ एक छोटे से यंत्र में सिमटी होती हैं। ऐसे में जब वह खो जाता है तो सिर्फ जेब खाली नहीं होती, दिल भी भारी हो जाता है। लेकिन पुलिस ने इस दर्द को समझते हुए एक ऐसी पहल को अंजाम दिया है, जिसने सैकड़ों चेहरों पर मुस्कान लौटा दी है।
मई माह में चलाए गए विशेष अभियान के तहत पुलिस ने 462 गुमशुदा मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक मालिकों को वापस सौंप दिया, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 95 लाख रुपये आंकी गई है। यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों की राहत, सुकून और उम्मीद की वापसी है।
रिज़र्व पुलिस लाइन्स स्थित रविन्द्रालय में आयोजित कार्यक्रम का माहौल बेहद भावुक रहा। जब लोगों के हाथों में उनके खोए हुए मोबाइल वापस आए तो कई आंखें नम हो गईं। किसी ने कांपते हाथों से फोन को सीने से लगाया, तो किसी के चेहरे पर महीनों बाद सुकून की मुस्कान लौटी। लोगों ने कहा हमें नहीं लगा था कि अब यह वापस मिलेगा, लेकिन पुलिस ने करिश्मा कर दिया। इस पूरे अभियान की कमान एसएसपी अनुराग आर्य के हाथों में रही। उनके स्पष्ट निर्देशन और तकनीक आधारित पुलिसिंग की सोच ने इस अभियान को एक जन आंदोलन का रूप दे दिया। उनके नेतृत्व में सर्विलांस टीम, साइबर सेल और तकनीकी विशेषज्ञों ने दिन रात एक कर दिया। आधुनिक संसाधनों के साथ भारत सरकार के सीईआईआर पोर्टल की मदद से हर गुम मोबाइल की डिजिटल पहचान को ट्रेस किया गया। एसएसपी अनुराग आर्य की खासियत यह रही कि उन्होंने इस अभियान को केवल रिकवरी ड्राइव नहीं रहने दिया, बल्कि इसे जनता के भरोसे से जोड़ दिया। उनका संदेश साफ था पुलिस सिर्फ कार्रवाई नहीं करती, बल्कि लोगों की भावनाओं को भी लौटाती है। इस अभियान में पुलिस अधीक्षक साउथ अंशिका वर्मा की भूमिका भी उल्लेखनीय रही। उन्होंने फील्ड स्तर पर निगरानी, टीमों के समन्वय और साइबर यूनिट के साथ लगातार संवाद बनाए रखते हुए यह सुनिश्चित किया कि हर शिकायत को गंभीरता से लिया जाए। उनके सक्रिय मार्गदर्शन में कई मामलों का त्वरित निस्तारण संभव हो सका, जिससे अभियान की गति और अधिक प्रभावी बनी। साइबर टीमों ने न केवल तकनीक का सहारा लिया, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण के साथ हर केस को संवेदनशीलता से देखा। डेटा विश्लेषण, लोकेशन ट्रैकिंग और लगातार फॉलोअप के जरिए एक एक मोबाइल को खोजकर उसके असली मालिक तक पहुंचाया गया। इस अभियान में प्रेमनगर, कैंट, किला, सीबीगंज, फरीदपुर, भोजीपुरा, नवाबगंज, शाही और अलीगंज सहित कई थानों की साइबर टीमों ने सराहनीय कार्य किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। आंकड़ों पर नजर डालें तो जनवरी 2025 से मई 2026 तक बरेली पुलिस ने कुल 5259 गुमशुदा मोबाइल फोन बरामद किए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 10.5 करोड़ रुपये है। यह उपलब्धि केवल तकनीकी सफलता नहीं, बल्कि जनता के विश्वास की पुनर्स्थापना है। मोबाइल पाने वाले लोगों ने कहा कि यह उनके लिए केवल फोन की वापसी नहीं, बल्कि टूटे भरोसे की मरम्मत है। कई लोगों ने भावुक होकर कहा कि बरेली पुलिस ने उन्हें यह एहसास कराया कि सिस्टम अभी भी इंसानियत से जिंदा है। एसएसपी अनुराग आर्य के नेतृत्व में यह अभियान अब एक मिसाल बन चुका है जहां वर्दी केवल सख्ती का प्रतीक नहीं, बल्कि उम्मीद, भरोसा और इंसानियत की रोशनी बनकर सामने आई है।