कागजों पर इस्तीफा, हकीकत में हाईटेंशन लाइन पर काम; शाही बिजलीघर का बड़ा कारनामा
शाही विद्युत उपकेंद्र में बड़ा फर्जीवाड़ा। 31 अक्टूबर को इस्तीफा मंजूर होने के बाद भी बिना बहाली के हाईटेंशन लाइन पर काम कर रहा संविदाकर्मी। SDO ने दी विभागीय कार्रवाई की चेतावनी।
शाही विद्युत उपकेंद्र में नियमों को ताक पर रखकर बिना आधिकारिक बहाली आदेश के पूर्व संविदाकर्मी से कराया जा रहा काम।
31 अक्टूबर को उत्पीड़न का आरोप लगाकर संविदाकर्मी फूल सिंह ने दिया था इस्तीफा, विभाग ने उसी दिन कर लिया था स्वीकार।
मामले पर एसडीओ सूर्य प्रताप मीरगंज का सख्त रुख "बहाली नहीं हुई है, काम करता पाया गया तो होगी विभागीय कार्रवाई।"
दीनानाथ कश्यप, शाही। बरेली।
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के शाही विद्युत उपकेंद्र में विभागीय लापरवाही और नियमों की अनदेखी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां कागजों और जमीनी हकीकत का टकराव इस कदर खुलकर सामने आ गया है कि बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारी खुद सवालों के घेरे में हैं। उपकेंद्र में गत 31 अक्टूबर को लिखित त्यागपत्र मंजूर होने के बाद आधिकारिक रूप से विभाग से बाहर हो चुके एक पूर्व संविदाकर्मी को बिना किसी कानूनी बहाली आदेश के सीधे मौत से खेलने के लिए हाईटेंशन लाइन पर उतारा जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार, संविदाकर्मी फूल सिंह पुत्र नत्थू लाल ने तत्कालीन अवर अभियंता पर बिजली कर्मी द्वारा उत्पीड़न करने का गंभीर आरोप लगाते हुए लिखित इस्तीफा सौंप दिया था। विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उसी दिन उनका इस्तीफा स्वीकार कर उनकी संविदा को पूरी तरह समाप्त कर दिया था। इसके बाद से ही बिजली विभाग के सरकारी रिकॉर्ड में फूल सिंह का नाम एक कर्मचारी के तौर पर कहीं भी दर्ज नहीं है।
चर्चा है कि जैसे ही उपकेंद्र में नए अवर अभियंता ने कार्यभार संभाला, वैसे ही बिना किसी कागजी बहाली या सक्षम अधिकारी के लिखित आदेश के फूल सिंह की फील्ड में रहस्यमयी तरीके से वापसी हो गई। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि वह रोज सामान्य दिनों की तरह लाइन का फॉल्ट जोड़ रहा है और बिजली का शटडाउन भी ले रहा है।
तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि पीली टोपी पहने यह शख्स किस तरह ग्रामीणों की मौजूदगी में बिजली लाइनों के काम की मॉनिटरिंग और मरम्मत में सक्रिय है। विद्युत अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत हाईटेंशन लाइन जैसे संवेदनशील और जानलेवा काम के लिए सक्षम प्राधिकारी का लिखित आदेश होना अनिवार्य है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब सरकारी दस्तावेजों में फूल सिंह विभाग से पूरी तरह बाहर है, तो आखिर किसके गुप्त आदेश या सह पर उसे सीधे हाईटेंशन लाइन पर काम करने की छूट दी जा रही है? बिना किसी कानूनी अधिकार और सुरक्षा मानकों के लाइन पर काम कराना सीधे तौर पर सुरक्षा नियमों का खुला उल्लंघन है। यदि काम के दौरान कोई अप्रिय घटना या बड़ा हादसा हो जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी? क्योंकि विभागीय रिकॉर्ड में तो उसकी कोई बहाली ही नहीं है।
इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी रोष है। ग्रामीणों ने मांग की है कि विद्युत विभाग तुरंत इस स्थिति को स्पष्ट करे। यदि संबंधित व्यक्ति की नियमसंगत बहाली हुई है तो उसका आदेश सार्वजनिक किया जाए और यदि बहाली नहीं हुई है, तो बिना अधिकार के चल रहा यह जानलेवा खेल तत्काल बंद कराया जाए।
इस पूरे गंभीर प्रकरण के संबंध में जब एसडीओ सूर्य प्रताप मीरगंज से सीधी बातचीत की गई, तो उन्होंने बताया "मैंने इस मामले की जानकारी प्राप्त की है। संबंधित व्यक्ति से कोई कार्य नहीं कराया जा रहा है और न ही अभी उसकी कोई बहाली हुई है। इसके बावजूद यदि वह फील्ड में काम करता हुआ पाया गया, तो नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ बेहद सख्त विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।"