मॉडल रोड के नाम पर खतरे की लाइन!
बरेली के स्टेडियम रोड पर अंडरग्राउंड बिजली केबल के ठीक बराबर पेयजल पाइपलाइन बिछा दी गई। विशेषज्ञों ने बड़े हादसे की चेतावनी दी।
बड़ी लापरवाही: स्टेडियम रोड पर अंडरग्राउंड बिजली केबल के ठीक बराबर बिछाई गई पेयजल पाइपलाइन।
करंट का खतरा: विशेषज्ञों के मुताबिक पाइपलाइन में लीकेज या केबल फॉल्ट होने पर फैल सकता है करंट।
मानकों की अनदेखी: पहले भी आईआईटी कानपुर की टीम निर्माण में तकनीकी खामियों पर नाराजगी जता चुकी है।
जन माध्यम
बरेली। शहर को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और मॉडल रोड देने के दावों के बीच स्टेडियम रोड पर निर्माण कार्य में सामने आई एक बड़ी तकनीकी चूक ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सीएम ग्रिड योजना के तहत चल रहे कार्य में अंडरग्राउंड बिजली लाइन के ठीक बराबर पेयजल पाइपलाइन बिछा दी गई है। विशेषज्ञ इसे गंभीर लापरवाही मान रहे हैं और चेतावनी दे रहे हैं कि फॉल्ट या लीकेज की स्थिति में पानी की पाइपलाइन में करंट उतर सकता है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
शासन ने फेस वन मॉडल टाउन योजना के तहत शहर की पांच प्रमुख सड़कों के चौड़ीकरण और आधुनिक विकास के लिए करीब 57 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी अनमोल कंस्ट्रक्शन को दी गई। योजना के अंतर्गत सड़क के नीचे बिजली केबल, पानी की पाइपलाइन और अन्य यूटिलिटी सेवाओं का नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। लेकिन स्टेडियम रोड स्थित गुरुजी मार्बल के पास निर्माण कार्य के दौरान हाई और लो टेंशन बिजली लाइन के बेहद करीब पेयजल पाइपलाइन डाल दी गई।
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार सुरक्षा मानकों के तहत बिजली लाइन और पानी की पाइपलाइन के बीच पर्याप्त दूरी होना जरूरी होता है, ताकि किसी भी तकनीकी खराबी की स्थिति में जनहानि का खतरा न बने। लेकिन मौके पर यह मानक पूरी तरह नजरअंदाज किए गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान कई जगह जल्दबाजी और लापरवाही साफ दिखाई दी। सूत्रों के मुताबिक इससे पहले भी निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ चुके हैं। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञ निरीक्षण के दौरान कई तकनीकी खामियों पर नाराजगी जता चुके हैं। इसके बावजूद कार्यदायी संस्था द्वारा सुधारात्मक कदम न उठाए जाने से लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर यदि सुरक्षा मानकों से समझौता किया जाएगा तो यह सुविधाओं से ज्यादा खतरे पैदा करेगा। अब लोगों की नजर प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्रवाई पर टिकी हुई है कि इस गंभीर तकनीकी लापरवाही पर क्या कदम उठाए जाते हैं।