डीएम पहुंचे जिला अस्पताल मिली बदहाली, फायर सिस्टम फेल गंदगी का मिला अम्बर,  निरीक्षण के बाद अस्पताल में हड़कंप

डीएम पहुंचे जिला अस्पताल मिली बदहाली, फायर सिस्टम फेल गंदगी का मिला अम्बर,  निरीक्षण के बाद अस्पताल में हड़कंप
जिला अस्पताल का निरीक्षण करते जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार

बरेली। स्वास्थ्य सेवाओं की खस्ता हालत और लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जिला अधिकारी रविन्द्र कुमार ने जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। अस्पताल की दुर्दशा देखकर डीएम का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। इमरजेंसी और जनरल वार्ड की हालत देखकर जहां मरीजों की तकलीफें उजागर हुईं, वहीं अस्पताल परिसर की गंदगी ने स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत बयां कर दी।

निरीक्षण के दौरान डीएम रविन्द्र कुमार ने पाया कि अस्पताल परिसर और वार्डों में हर तरफ गंदगी फैली हुई थी, बिस्तर धूल से भरे थे, और कूड़ेदान कचरे से लबालब भरे हुए थे। डीएम ने साफ शब्दों में कहा कि ऐसी स्थिति में मरीज ठीक होने की बजाय और बीमार हो सकते हैं। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई और तत्काल सफाई व्यवस्था सुधारने के आदेश दिए।

अस्पताल में फायर सेफ्टी के इंतजामों का निरीक्षण करते समय भी गंभीर खामियां सामने आईं। फायर उपकरण या तो खराब थे या फिर उनकी देखरेख की व्यवस्था नदारद थी। डीएम ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे हालात में आपात स्थिति से निपटने के दावे मात्र दिखावा साबित होते हैं। उन्होंने फायर सेफ्टी उपकरणों की नियमित जांच और उचित रखरखाव सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान डीएम ने मरीजों और उनके परिजनों से सीधा संवाद किया। मरीजों ने अस्पताल में दवाओं की कमी, डॉक्टरों की अनुपस्थिति और वार्डों में गंदगी जैसी समस्याओं को खुलकर सामने रखा। कुछ मरीजों ने बताया कि उन्हें सामान्य जांच के लिए भी अस्पताल के बाहर निजी केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो जाती है। यह जानकर डीएम ने अस्पताल प्रशासन पर गहरी नाराजगी व्यक्त की।
निरीक्षण के दौरान डीएम ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) विश्राम सिंह और महिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी त्रिभुवन प्रसाद को फटकार लगाते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्टाफ को अपनी जिम्मेदारियां समझने और व्यवस्थाओं को तुरंत दुरुस्त करने के सख्त आदेश दिए। डीएम ने साफ कहा कि सरकारी अस्पतालों का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंदों को उचित और सुलभ इलाज प्रदान करना है, लेकिन यहां की स्थिति ने इस उद्देश्य को पूरी तरह विफल कर दिया है।

अस्पताल का दौरा करते हुए डीएम को यह भी पता चला कि कई व्यवस्थाएं केवल कागजों पर ही सही हैं। सफाई व्यवस्था हो, उपकरणों की उपलब्धता हो या फिर डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की उपस्थिति—सब जगह लापरवाही का आलम था। डीएम ने इस पर गहरी चिंता जाहिर करते हुए अस्पताल प्रशासन को एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया, जिसमें सभी खामियों और उनकी सुधार योजना का विवरण हो।