बिजली विभाग अफसर तानाशाही के खिलाफ फूटा जूनियर इंजीनियरों का गुस्सा

बिजली विभाग अफसर तानाशाही के खिलाफ फूटा जूनियर इंजीनियरों का गुस्सा
HIGHLIGHTS:

1. चार दिन से बिजली व्यवस्था ध्वस्त, करोड़ों के नुकसान पर भी चीफ इंजीनियर सेकंड शहर सपाटा
2. आदेशों की अवहेलना, आंदोलन की अनदेखी और जनता की पीड़ा—कहीं सुनवाई नहीं,
3. बरेली, शाहजहांपुर, बदायूं और पीलीभीत के जूनियर इंजीनियर धरने  पर—बिजली विभाग में बगावत की चेतावनी

बरेली। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन की बदहाल व्यवस्था एक बार फिर जनमानस के सामने बेनकाब हो गई है। बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर और पीलीभीत के जूनियर इंजीनियर पिछले चार दिनों से हड़ताल पर हैं। लेकिन अफसोस की बात यह है कि पावर कारपोरेशन के वरिष्ठ अधिकारी और खासकर चीफ इंजीनियर (सेकंड) अब तक पूरी तरह से चुप्पी साधे बैठे हैं।

आश्चर्य की बात यह है कि पावर कारपोरेशन के चेयरमेन आशीष गोयल ने स्वयं मंगलवार को बैठक में साफ निर्देश दिए थे कि धरने को तत्काल समाप्त कराया जाए और इंजीनियरों की जायज मांगों का निस्तारण किया जाए। इसके बावजूद आदेशों की इस तरह अवहेलना बताती है कि विभाग में किस स्तर तक अराजकता और मनमानी का बोलबाला है।

धरने की वजह से चारों जिलों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह चरमरा चुकी है। ट्रांसफार्मर फुंकने से लेकर लाइन फॉल्ट तक की किसी भी शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं हो रही। शहरों में अंधेरा है, गांवों में पानी की आपूर्ति बाधित है, अस्पतालों और स्कूलों तक में बिजली कटौती से कामकाज ठप है। लाखों लोग बेहाल हैं, लेकिन अफसरों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही।राजस्व की बात करें तो केवल बरेली और बदायूं में ही करोड़ों रुपये की वसूली पर सीधा असर पड़ा है। बिजली बिल जमा करने वाले उपभोक्ता लाइनमैन और अवर अभियंता न होने के कारण परेशान हो रहे हैं। हजारों कनेक्शन के काम अटके हुए हैं।इस पूरे विवाद की जड़ बदायूं के उपखंड अधिकारी इंजीनियर शोएब अंसारी का निलंबन है, जिसे संगठन ने पूरी तरह से अनुचित, अन्यायपूर्ण और तानाशाही बताया है। इसके अतिरिक्त दो और मुख्य मांगें हैं।इं. शोएब अंसारी का निलंबन तत्काल रद्द किया जाए। 400/250 केवीए ट्रांसफार्मर क्षति के फर्जी आरोप और विविध प्रकीर्ण आदेश वापस लिए जाएं। बदायूं के संगठन पदाधिकारियों के हुए तबादले तत्काल निरस्त किए जाएं और दोषी अफसरों के खिलाफ निष्पक्ष जांच हो।जूनियर इंजीनियर्स संगठन का साफ कहना है कि जब तक तीनों मांगें पूरी नहीं होतीं, विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। और यदि इस बीच किसी भी सदस्य को प्रबंधन द्वारा उत्पीड़न का शिकार बनाया गया, तो आंदोलन प्रदेशव्यापी होगा और उग्र रूप लेगा।चीफ इंजीनियर सेकंड, जो बरेली संभाग के सबसे बड़े अधिकारी माने जाते हैं, अब तक आंदोलनकारियों से एक बार भी बातचीत करने नहीं आए। जबकि चीफ इंजीनियर सेकंड अपने बच्चों के साथ  पीलीभीत की चुका बीच में शहर सपाटा कर रहे हैं और 2 दिन से बरेली कार्यालय तक नहीं आए हैं। उन्होंने चेयरमेन के आदेश की न केवल अवहेलना की, बल्कि आंदोलन को नजरअंदाज कर अपने कर्तव्यों का भी खुला उल्लंघन किया।

ऐसे में बड़ा सवाल उठता है—क्या पावर कारपोरेशन जैसी महत्वपूर्ण संस्था में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेही से मुक्त समझ लिया जाए?राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मांगे नहीं मानी गईं, तो आंदोलन लखनऊ तक पहुंचेगा। संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कहा है कि बरेली से लखनऊ तक की सड़कें सरकार को इस तानाशाही के खिलाफ आवाज देती सुनाई देंगी।