पीएमईजीपी की पोल खुली

आंवला क्षेत्र में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम कागजों में सिमट गया है। तीन वर्षों में दर्जनों आवेदनों के बावजूद केवल दो लोगों को ही योजना का लाभ मिल पाया।

पीएमईजीपी की पोल खुली
आंवला सांसद नीरज मौर्य
HIGHLIGHTS:

➡️ आंवला में पीएमईजीपी योजना सिर्फ कागजों तक सीमित
➡️ तीन साल में केवल दो लाभार्थियों को मिली मंजूरी
➡️ 2023-25 में न सब्सिडी, न नया ऋण स्वीकृत

हसीन दानिश / जनमाध्यम

बरेली। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) आंवला संसदीय क्षेत्र में महज कागजी योजना बनकर रह गया है। बीते तीन वर्षों के आंकड़े चौंकाने वाले हैं, जिनमें सामने आया है कि दर्जनों आवेदनों के बावजूद केवल दो लोगों को ही योजना का लाभ मिल सका, जबकि शेष आवेदन लंबित या अस्वीकृत कर दिए गए।

समाजवादी पार्टी के सांसद नीरज मौर्य द्वारा लोकसभा में पूछे गए सवाल के लिखित उत्तर में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की राज्य मंत्री शोभा करांदलाजे ने यह जानकारी दी। जवाब में स्वीकार किया गया कि आंवला क्षेत्र में वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान न तो कोई सब्सिडी जारी की गई और न ही किसी नए ऋण को मंजूरी दी गई।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022-23 में मात्र 6.04 लाख रुपये की सब्सिडी और 17.76 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया था। इसके बाद योजना की प्रगति पूरी तरह ठप हो गई। कुल 26 आवेदनों में से केवल दो को ही मंजूरी मिली, जबकि शेष आवेदनों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

सरकार ने अपने उत्तर में माना है कि बैंक स्तर पर ऋण स्वीकृति में देरी, दस्तावेजों की जटिल प्रक्रिया और प्रशासनिक सुस्ती योजना के क्रियान्वयन में बड़ी बाधाएं हैं। इसके बावजूद आंवला जैसे क्षेत्रों में लगातार शून्य प्रगति पर न तो कोई ठोस कारण बताया गया और न ही सुधार के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप सामने रखा गया।

सांसद नीरज मौर्य ने इसे सरकार की नीतिगत विफलता करार देते हुए कहा कि क्षेत्र के युवा, महिलाएं और छोटे उद्यमी रोजगार सृजन की इस महत्वाकांक्षी योजना से वंचित रह गए हैं। उन्होंने कहा कि केवल आंकड़े पेश करना काफी नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर तत्काल हस्तक्षेप और प्रभावी निगरानी जरूरी है।

आंवला क्षेत्र में बढ़ती बेरोजगारी और छोटे कारोबारियों की लगातार बढ़ती परेशानियों के बीच यह खुलासा कई गंभीर सवाल खड़े करता है। रोजगार की उम्मीद लगाए बैठे युवाओं के लिए पीएमईजीपी योजना का यह हाल सरकार की कार्यप्रणाली पर सीधा सवाल बनकर सामने आया है।