93 साल बाद बदला केसर चीनी मिल का मालिकाना हक
आर्थिक संकट से जूझ रही बहेड़ी की केसर चीनी मिल 431 करोड़ रुपये में अवध फूड्स को बेची गई। प्रबंधन के अनुसार बिक्री रकम से किसानों का 164 करोड़ रुपये बकाया चुकाया जाएगा।
1933 में स्थापित केसर चीनी मिल 431 करोड़ रुपये में अवध फूड्स को बेची गई।
प्रबंधन के मुताबिक किसानों के 164 करोड़ रुपये के बकाये को प्राथमिकता से चुकाया जाएगा।
भुगतान की मांग को लेकर किसान संगठन का धरना मंगलवार को भी जारी रहा।
जन माध्यम
बरेली। आर्थिक संकट से जूझ रही बहेड़ी की केसर चीनी मिल का मालिकाना हक 93 साल बाद बदल गया। सहारनपुर के कारोबारी संजीव कुमार कपूर की कंपनी अवध फूड्स ने मिल को 431 करोड़ रुपये में खरीद लिया है। मिल प्रबंधन के अनुसार सौदे की रकम से सबसे पहले गन्ना किसानों के करीब 164 करोड़ रुपये के बकाये का भुगतान किया जाएगा।
किला चंद परिवार ने वर्ष 1933 में बहेड़ी में केसर चीनी मिल की स्थापना की थी। करीब नौ दशक तक मिल इसी परिवार के स्वामित्व में रही। बहेड़ी और आसपास के इलाकों के हजारों किसानों की आजीविका भी इससे जुड़ी रही। पिछले पांच-छह वर्षों में आर्थिक संकट बढ़ने के साथ मिल की स्थिति खराब होती गई।
आर्थिक परेशानी का असर गन्ना किसानों के भुगतान पर भी पड़ा। दो पेराई सत्रों का करीब 164 करोड़ रुपये बकाया बताया जा रहा है। भुगतान की मांग को लेकर किसान लगातार आंदोलन कर रहे हैं।
किला चंद परिवार के हर्ष आर. किला चंद ने मिल बेचने का निर्णय लिया था। खरीद के लिए कई कंपनियों से बातचीत के बाद अवध फूड्स के साथ 431 करोड़ रुपये में सौदा तय हुआ। सोमवार देर शाम डील फाइनल हुई और मंगलवार को मिल के सीईओ शरद मिश्र ने इसकी घोषणा की।
सीईओ शरद मिश्र ने बताया कि बिक्री की रकम से किसानों का बकाया गन्ना मूल्य चुकाना पहली प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि सौदा पूरा होने के बाद चीनी मिल की किसी जमीन की नीलामी नहीं कराई जाएगी।
मंगलवार को जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने कलक्ट्रेट सभागार में बहेड़ी क्षेत्र के गन्ना किसानों के साथ बैठक की। बैठक मुड़िया मुकर्रमपुर स्थित मिल की कुर्क जमीन की प्रस्तावित नीलामी को लेकर थी। बेहतर कीमत के लिए जिले से बाहर तक प्रचार-प्रसार कराने का निर्णय लिया गया था।
डीएम ने किसानों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मिल की बिक्री प्रबंधन का आंतरिक मामला है, जबकि कुर्क जमीन की नीलामी किसानों का बकाया भुगतान कराने के लिए प्रस्तावित थी।
भारतीय किसान यूनियन (भानु) का किसानों के बकाया भुगतान की मांग को लेकर धरना मंगलवार को भी जारी रहा। एक सप्ताह से आंदोलन कर रहे किसानों ने बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर के प्रतिनिधियों के साथ महापंचायत की। दिन में मिल प्रबंधन से बातचीत हुई, लेकिन सहमति नहीं बन सकी।
देर रात तक किसान धरनास्थल पर डटे रहे। मिल की बिक्री से किसानों को भुगतान की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन अब उनकी नजर 164 करोड़ रुपये के बकाये के वास्तविक भुगतान पर है।