10 हजार की रिश्वत लेते ट्रेनी दरोगा गिरफ्तार
बरेली में बैरियर टू चौकी पर तैनात ट्रेनी दरोगा विमल चौहान को एंटी करप्शन टीम ने 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
बैरियर टू चौकी पर तैनात ट्रेनी दरोगा गिरफ्तार
10 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया
एंटी करप्शन टीम ने योजनाबद्ध तरीके से की कार्रवाई
घटना के बाद पुलिस विभाग में मचा हड़कंप
हसीन दानिश। जन माध्यम
बरेली। जनता को न्याय दिलाने और कानून व्यवस्था संभालने वाली खाकी एक बार फिर भ्रष्टाचार के आरोपों से कटघरे में खड़ी नजर आई। बरेली में एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई ने पुलिस विभाग को झकझोर दिया, जब बैरियर टू चौकी पर तैनात ट्रेनी दरोगा विमल चौहान को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया। इस कार्रवाई के बाद चौकी और थाना परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार एंटी करप्शन टीम को शिकायत मिली थी कि ट्रेनी दरोगा एक मामले में कार्रवाई करने के नाम पर रिश्वत की मांग कर रहा था। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए टीम ने पूरे मामले की गोपनीय जांच शुरू की। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया।
बताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता को तय रकम देकर चौकी भेजा गया। जैसे ही ट्रेनी दरोगा ने 10 हजार रुपये अपने हाथ में लिए, पहले से मौके पर मौजूद एंटी करप्शन टीम ने उसे पकड़ लिया। तलाशी के दौरान रिश्वत की रकम भी बरामद कर ली गई।
अचानक हुई इस कार्रवाई से चौकी परिसर में हड़कंप मच गया। वहां मौजूद कई पुलिसकर्मी पूरे घटनाक्रम को देखकर स्तब्ध रह गए। एंटी करप्शन टीम आरोपी दरोगा को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ कर रही है। उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
सूत्रों के मुताबिक विमल चौहान की नियुक्ति मृत आश्रित कोटे से हुई थी और वह प्रशिक्षण अवधि में ही चौकी पर तैनात था। नौकरी की शुरुआत में ही रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तारी ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। माना जा रहा है कि उसके खिलाफ विभागीय जांच और निलंबन की कार्रवाई भी जल्द की जा सकती है।
इस घटना ने आम लोगों के बीच पुलिस व्यवस्था को लेकर एक बार फिर अविश्वास की भावना पैदा कर दी है। लोगों का कहना है कि जब कानून का पालन कराने वाले ही रिश्वत लेने लगें तो न्याय व्यवस्था पर भरोसा कमजोर पड़ने लगता है। खाकी पर लगा यह नया दाग पुलिस विभाग की छवि को गहरा नुकसान पहुंचाने वाला माना जा रहा है।
उधर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। एंटी करप्शन टीम अब इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपी दरोगा पहले भी इस तरह की अवैध वसूली में शामिल रहा है या नहीं। फिलहाल पूरे मामले की गहन जांच जारी है।